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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 609

३३६ भारत में अंगरेज़ी राज
थी। एक फ़्रांसीसी इतिहास लेखक लिखता है कि इस विजय के
[मद्रास क़िले के] अवसर पर हैदर ने अंगरेज़ों से कहकर मद्रास
[फाटक पर एक] के सेण्ट जॉर्ज क़िले के सदर फाटक पर एक चित्र
[चित्र] बनवाया, जिसमें हैदर एक शामियाने के नीचे
तोपों के ढेर के ऊपर बैठा हुआ है, पीछे की ओर
सेण्ट जॉर्ज का क़िला है जिसकी फ़सील पर गवर्नर और उसकी
कौन्सिल के सब अंगरेज़ मेम्बर दोज़ानू बैठे हुए हैदर की ओर
अपने हाथ बढ़ा रहे हैं। अंगरेज़ दूत डूप्रे और बौशियर दोनों हैदर
के सामने ज़मीन पर दोज़ानू बैठे हैं। डूप्रे के नाक की जगह हाथी
की सी सूँड बनी हुई है, हैदर उसकी सूँड को पकड़े हुए है और
उसमें से अशरफ़ियाँ हैदर के सामने खनाखन ज़मीन पर गिर रही हैं।
दूसरी ओर पराजित अंगरेज़ सेनापति जनरल स्मिथ सन्धि पत्र
हाथ में लिए हुए अपने हाथ से अपनी तलवार के दो टुकड़े कर
रहा है।
इस सन्धि का यहाँ तक असर हुआ कि इंगलिस्तान में उसकी
[कम्पनी के हिस्सों] ख़बर पहुँचते ही ईस्ट इण्डिया कम्पनी के हिस्सों
[की दर का गिरना] की दर एकदम गिर कर ४० फ़ी सदी रह गई।
युद्ध के दिनों में ही जैसे जैसे हैदर और टीपू की
विजयों की ख़बरें इंगलिस्तान पहुँचती जाती थीं, कम्पनी के हिस्सों
की दर गिरती जाती थी। इस पर डाइरेक्टरों ने बार बार मद्रास
के अधिकारियों पर ज़ोर दिया कि हैदर के साथ सुलह कर ली
जावे। किन्तु अब सुलह हो जाने पर उन्हीं डाइरेक्टरों ने मद्रास