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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 569

२६८ भारत में अंग्रेज़ी राज
सन्धि के अनुसार राघोबा को झाँसी की ओर भेज दिया जाय,
ताकि मैं राघोबा के पुत्र बाजीराव को साथ लेकर पूना के लिए
रवाना हो जाऊँ । किन्तु गॉडर्ड का मतलब निकल चुका था। वह
राघोबा को इस तरह हाथ से छोड़ देने के लिए तैयार न था। उसने
अब तालेगाँव की गुप्त सन्धि को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
माधोजी को ज़बरदस्त नैराश्य और दुख हुआ। गॉडर्ड ने इस
हालत में उसे देर तक गुजरात में रहने देना ठीक न समझा। चन्द
रोज़ के अन्दर ही उसने बिल्कुल अचानक माधोजी की सेना पर
हमला कर दिया। माधोजी की सेना को तैयार होने का समय भी
न मिल सका। जिस तरह पेशवा के दल में माधोजी अंग्रेज़ों से
मिल गया था, उसी प्रकार माधोजी की सेना में न मालूम कितने
इस समय गॉडर्ड से मिले हुए होंगे। अन्त में गॉडर्ड ने कर्त्तव्य
विमूढ़ माधोजी और उसकी सेना को गुजरात से खदेड़कर बाहर
कर दिया। कर्नल गॉडर्ड के लिए अब केवल पूना पर हमला करना
बाक़ी था।
दूरदर्शी नाना को जब माधोजी की कर्त्तव्य विमुखता, होलकर
[पार्श्व: समस्त भारतीय] की असफलता और अंग्रेज़ों के इरादों का पता
[पार्श्व: नरेशों को मिलाने] चला, तो उसने फ़ौरन हिन्दोस्तान के क़रीब
[पार्श्व: की नाना की] क़रीब सब मुख्य मुख्य नरेशों को इन विदेशियों
[पार्श्व: कोशिश] के ख़िलाफ़ अपने साथ मिलाने के ज़ोरदार प्रयत्न
शुरू किए। हैदराबाद के निज़ाम, अरकाट के
नवाब, मैसूर के सुलतान हैदरअली और दक्खिन के अन्य कई