भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 546, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंपहला मराठा युद्ध २७७
की विधवा स्त्री के, जो अपने पति की हत्या के समय गर्भवती थी,
[पूना में दूसरे पेशवा] एक पुत्र हुआ। पूना दरबार ने एक मत से इस
[की नियुक्ति] बालक के पेशवा नियुक्त होने का एलान कर
दिया। प्रजा ने मसनद नशीनी की खुशियाँ मनाईं।
किन्तु अंगरेज़ों का हित राघोबा ही को पेशवा बनाने में था।
उन्होंने राघोबा को अपने पास सूरत बुलवा
[पहले मराठा युद्ध] लिया। सूरत में ६ मार्च सन् १७७५ को राघोबा
[की जड़] और अंगरेज़ों में एक सन्धि हो गई, जिसमें
राघोबा ने साष्टी, बसई' और सूरत प्रान्त का एक भाग कम्पनी के
नाम लिख दिया और बम्बई की अंगरेज़ कौन्सिल ने इसके बदले
में राघोबा को कम्पनी की सेना सहित पूना भेजने और पेशवा की
मसनद पर बैठाने का वादा किया। यह नाजायज़ सन्धि ही पहले
मराठा युद्ध की जड़ थी।
कर्नल कीटिंग के अधीन कम्पनी की सेना और राघोबा की
सेना दोनों मिल कर राघोबा को ज़बरदस्ती
[अंगरेज़ों की] पेशवा की मसनद पर बैठाने की ग़रज़ से पूना
[पहली हार] की ओर बढ़ीं। उधर पूना दरबार ने सेनापति
हरिपन्त फड़के के अधीन एक सेना राघोबा की बग़ावत को दमन
करने के लिए गुजरात की ओर रवाना कर दी। १८ मई सन् १७७५
को आरास नामक स्थान पर दोनों ओर की सेनाओं में घमासान
संग्राम हुआ, जिसमें राघोबा और उसके मददगारों की हार हुई।
अंगरेज़ों की बहुत सी सेना और अनेक अंगरेज़ अफ़सर मारे गए।