भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपहला मराठा युद्ध २७५
अपने उन आदमियों के नाम भेजा था, जिन्होंने नारायनराव को
क़त्ल किया, उसमें शब्द 'धरावे' था जिसका अर्थ 'पकड़ना' है और
मेरा मतलब केवल नारायनराव को गिरफ़्तार कराने का था, किन्तु
बाद में बीच ही में किसी ने कहीं पर 'धरावे' शब्द को बदल कर
'मारावे' कर दिया। इसमें भी कोई सन्देह नहीं हो सकता कि इस
हत्याकांड में मॉस्टिन का पूरा हाथ था। सर हेनरी लारेन्स लिखता
है—"बाद में राघोबा ने नारायनराव को मार डाला × × × और
अंगरेज़ सरकार ने उसका साथ दिया। अंगरेज़ों के भारतीय
इतिहास का यह एक अत्यन्त पापमय अध्याय है।"*
उधर बम्बई की कौन्सिल ने नारायनराव की मृत्यु का समाचार
पाकर इस मौक़े को अपनी इच्छा पूर्ति के लिए ग़नीमत समझा।
३० अगस्त को पूना में पेशवा नारायनराव की हत्या हुई और
१७ सितम्बर को बम्बई की कौन्सिल ने मॉस्टिन को पत्र लिखा
कि—"इस अवसर पर साष्टी और बसई प्राप्त करने में जितनी
चीजें हमें मदद दे सकें, उन्हें तुम खूब परिश्रम के साथ बढ़ाना
और चाहे कुछ भी क्यों न हो, पूना छोड़ कर कहीं न जाना।"+
नारायनराव की मृत्यु के बाद राघोबा ने अपने आपको पेशवा
- "Raghoba afterwards murdered Narain Rao. and was
supported by the British Government. A very evil chapter in Anglo Indian
History."—Calcutta Review, vol. ii, p. 430.
+" . . . to improve diligently every circumstance favourable
to the accomplishment of that event (the possession of Salsette and Bassein),
and on no account whatever to leave the Marhatta Capital."—Mill, vol. iii,
p. 425.