भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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से भी उसका चरित्र उसके पूर्वाधिकारियों से कहीं अधिक प्रशंसा और आदर
के योग्य था।”*
पेशवा माधोराव की अचानक मृत्यु के सम्बन्ध में कम्पनी के
दूत मॉस्टिन पर सन्देह होना, ख़ास कर मॉस्टिन की अन्य करतूतों
को देखते हुए, बिलकुल स्वाभाविक है; किन्तु इन गुप्त पापों का
ठीक भेद इतने समय के बाद खुल सकना अत्यन्त कठिन है।
माधोराव के कोई बच्चा न था। मरने से पहले उसने अपने
भाई नारायनराव को पेशवा की मसनद के लिए नियुक्त कर दिया
और अपने चचा राघोबा से प्रार्थना की कि आप नारायनराव की
रक्षा और सहायता कीजियेगा।
राघोबा के लिए अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने और मॉस्टिन
के लिए राघोबा द्वारा अपने मालिकों की इच्छा
पेशवा नारायनराव को सफल बनाने, दोनों का अब ख़ासा सुन्दर
की हत्या अवसर था। ३० अगस्त सन् १७७३ को राघोबा
ने अपने भतीजे नारायनराव पेशवा को मरवा डाला। मॉस्टिन ने
बड़े उल्लास के साथ बम्बई की अंगरेज़ कौन्सिल को इस घटना की
सूचना दी।
नारायनराव की हत्या का भेद उसी समय पूरी तरह खुल गया।
जिन आदमियों ने नारायनराव को मारा वे राघोबा के आदमी थे।
पूछ ताछ होने पर राघोबा ने बयान किया कि जो मराठी पत्र मैंने
- Grant Duff's History of the Marhattas, p. 352.