सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 537, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 537

पहला मराठा युद्ध २७३
सूरत में मॉस्टिन की चालें कुछ दिनों तक न चल सकीं। इतिहास
लेखक मिल लिखता है कि थोड़े दिनों की बातचीत के बाद मॉस्टिन
ने देख लिया कि साष्टी और बसई इतनी आसानी से न मिल
सकेंगे।
फिर भी मॉस्टिन के प्रयत्न जारी रहे। सब से पहले उसने
राघोबा और नाना फड़नवीस को एक दूसरे से
अंगरेज़ दूत मॉस्टिन फोड़ने की कोशिश की। पेशवा माधोराव बालिग़
की करतूतें हो गया था। तब भी राघोबा मॉस्टिन के कहने
में आकर उसे नाना के प्रभाव से हटाकर अपने प्रभाव में रखने की
चेष्टा करता रहा। धीरे धीरे माधोराव और राघोबा में अनबन इतनी
बढ़ गई कि एक बार माधोराव ने विवश होकर अपने चचा राघोबा
को क़ैद कर दिया। शीघ्र ही राघोबा फिर छोड़ दिया गया। इतने
में १८ नवम्बर सन् १७७२ को २८ साल की अल्प आयु में माधो
राव की मृत्यु हो गई। माधोराव की मृत्यु मराठा साम्राज्य के लिए
बड़े दुर्भाग्य की घटना थी। इस नौजवान पेशवा की मौत का ज़िक्र
करते हुए ग्राण्ट डफ़ लिखता है :—
“दूर दूर तक फैले हुए मराठा साम्राज्य के उस वृक्ष को, जिसे कुछ
हानि पहले ही पहुँच चुकी थी, जो जड़ नीचे से रस पहुँचाती थी वह तने
से कटकर अलग हो गई। उस साम्राज्य का पानीपत के मैदान से भी
इतना धक्का न पहुँचा था जितना इस सुयोग्य शासक की अकाल मृत्यु से
पहुंचा। माधोराव युद्ध विद्या में तो अत्यन्त चतुर था ही, नरेश की हैसियत
१८