भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६० भारत में अंगरेज़ी राज
कर्नल हैनेवे को बरख़ास्त कर दिया। इसके बाद जब नवाब को
मालूम हुआ कि हेस्टिंग्स फिर कर्नल हैनेवे को मेरे सिर मढ़ने
की तजवीज़ कर रहा है तो नवाब ने हेस्टिंग्स को लिख दिया
कि—"मैं हज़रत मोहम्मद की क़सम खाता हूँ कि यदि आपने
मेरे यहाँ किसी काम पर भी कर्नल हैनेवे को नियुक्त किया तो मैं
सल्तनत छोड़कर निकल जाऊँगा।”*
दुर्भाग्यवश उस समय के कम्पनी के शासन का कोई सच्चा और
विस्तृत इतिहास किसी भारतवासी के हाथ का लिखा हुआ मौजूद
नहीं है।
अब हम फिर कोलब्रुक के पत्र की ओर आते हैं। हमें
[लगान का बढ़ाया] याद रखना चाहिए कि कम्पनी ही इस समय
[जाना] सारे बंगाल, बिहार और उड़ीसा की प्रजा से
लगान वसूल करती थी। यह लगान जिस
हिसाब से वसूल किया जाता था, उसके विषय में कोलब्रुक
लिखता है :—
"जिस पद्धति के अनुसार इस देश के अन्दर अंगरेज़ी इलाक़ों का शासन
किया जा रहा है उससे प्रजा की खुशहाली पर बुरा असर पड़ा है। × × ×
नमक और अफ़ीम के ठेक़ों का या उन तरीक़ों का जिनसे कम्पनी की
तिजारती पूँजी जमा की जाती है ज़िक्र छोड़कर, मैं केवल ज़मीन के लगान
का ज़िक्र करता हूँ। ज़मीन का लगान जहाँ तक बढ़ाया जा सकता था, बढ़ा
दिया गया है। मुग़ल सरकार के अधीन कोई ज़मींदार अपनी ज़मींदारी की
- Mill, Book v, Chapter, 8.