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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 515

वारन हेस्टिंग्स २५३
वह फिर वारन हेस्टिंग्स का दोस्त साबित हुआ । x x x अपनी पालकी में
बैठकर ग़ैर ईसाई कहारों की डॉक लगवाकर उनके कन्धों पर सर एलाइज़ाह
इम्पे कलकत्ते से लखनऊ रवाना हुआ; x x x एक माननीय वाइसराय की
आज्ञा पर उस वाइसराय को डकैती में मदद देने के लिए ईसाई चीफ़ जस्टिस
को पूरी तेज़ी के साथ अपने कन्धों पर ले जाने में ग़ैर-ईसाई हिन्दुओं का
उपयोग किया गया । रूहानी अन्धकार में डूबी हुई जनता को यूरोपियन
व्यवहार और यूरोपियन सदाचार की श्रेष्ठता का इससे बढ़कर और क्या सबूत
मिल सकता था ? अवध की राजधानी में पहुँच कर चीफ़ जस्टिस ने बहुत से
हलफ़नामे लिए, जिनमें बेगमों पर यह इलज़ाम लगाया गया कि वे चेतसिंह
के न्याय्य मालिकों यानी कम्पनी के विरुद्ध उस फ़रज़ी साज़िश में चेतसिंह
से मिली हुई थीं । सर एलाइज़ाह ने न हलफ़नामे पढ़े, न किसी से पढ़वाकर
सुने । वे एक ऐसी ज़बान में थे जिसे इम्पे समझता तक न था और न उसके
पास इतना समय था कि किसी दूसरे से तरजुमा करवाने का इन्तज़ार
करता । एशिया के अन्दर इंगलिस्तान के प्रधान न्यायाधीश की हैसियत से
उसने हलफ़नामे लिए और 'अपने उच्च अधिकार के इस घृणित दुरुपयोग'
को पूरा कर फिर पालकी में बैठ कलकत्ते लौट आया । x x x फ़ैज़ाबाद के
महलों को अंगरेज़ी सेना ने घेर लिया । बेगमों से कहा गया कि आप क़ैदी
हैं और अपने तमाम ज़ेवर, सोना, चाँदी और जवाहरात दे दीजिए । जब
बेगमों ने इनकार किया तो महल की शरीफ़ औरतों को भूखों मारा गया और
उनके नौकरों को बड़ी बड़ी यातनाएँ दी गईं । बेगमें जब इन लोगों के रोने
चीख़ने की आवाज़ों को न सह सकीं तो उन्होंने पिटारों पर पिटारे और
ख़ज़ानों पर ख़ज़ाने देना शुरू किया, यहाँ तक कि कुल लूट की क़ीमत का