भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५२ भारत में अंगरेज़ी राज
नवाब शुजाउद्दौला मरते समय अपनी माँ और अपनी विधवा बेगम दोनों
को बड़े बड़े ख़ज़ाने दे गया है। फ़ैज़ाबाद के महल भी वह उन्हीं के नाम
कर गया था, और ये दोनों बेगमें अपने अनेक सम्बन्धियों, बाँदियों और
नौकरों के साथ अपने इन्हीं प्यारे महलों में रहती थीं। इस धूर्तता की राय
देने वाला माननीय गवरनर जनरल था । आसफ़ुद्दौला सुनकर शर्म से काँप
उठा । x x x अन्त को x x x सौदा पक्का हो गया और दोनों अलग
अलग अपनी अपनी ओर से इस दग़ाबाज़ी की ज़ाब्तापूरी में लग गए । तय
हुआ कि x x x फ़ैज़ाबाद में रहने वाली कुम्हलाई हुई औरतों के सर यह
इलज़ाम मढ़ा जावे कि तुम अंगरेज़ों के ख़िलाफ़ चेतसिंह के साथ साज़िश
कर रही हो । यदि किसी तरह यह साज़िश साबित की जा सके तो फिर
बेगमों को हर तरह का दण्ड देना या उनके धन की ज़ब्ती जायज़ ठहराई जा
सकेगी; इसलिए साबित करना ज़रूरी था और साबित भी बाज़ाब्ता तरीक़े
से करना । जब लोगों को पता चला कि अंगरेज़ क्या चाहते हैं, तो झूठे
गवाह खड़े हो गए x x x बेगमों की तरफ़ से न कोई जवाबदेही करने वाला
था और न कोई वकालत करने वाला x x x । अब पेश्तर इसके कि बेगमों
के महल के फाटकों को तोड़कर अंगरेज़ी सेना भीतर घुस सके, केवल एक
कठिनाई और बाक़ी थी—लोकाचार और शिष्टता के एक रेशमी बन्धन को
तोड़ना ज़रूरी था। वह बन्धन यह था कि शुजाउद्दौला मरते समय अपने
इन सम्बन्धियों को अंगरेज़ सरकार की ख़ास संरक्षता में छोड़ गया था,
और गो कि अब स्थिति बदल चुकी थी, किन्तु उस समय अंगरेज़ सरकार
ने यह ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले ली थी । x x x सर एल्लाहजाह इम्पे पहले
भी कई ऐसी कठिनाइयों के मौक़े पर काम दे चुका था । इस संकट के समय