भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५० भारत में अंगरेज़ी राज
रानी समेत भाग कर वहाँ पहुँचा। अन्त में रामनगर का क़िला
भी जीत लिया गया और चेतसिंह ने एक गृहविहीन बटोही
की तरह वहाँ से भागकर ग्वालियर की रियासत में अपने शेष
दिन बिताए।
हेस्टिंग्स ने फ़ौरन उसकी जगह उसी कुल के एक १६ साल के
लड़के को बनारस की गद्दी पर बैठा दिया।
[बनारस की लूट] कम्पनी का ख़िराज बढ़ा कर बीस लाख रुपए
[और बरबादी] सालाना कर दिया गया। नए महाराजा के
अनेक अधिकार छीन कर रेजिडेण्ट को दे दिए गए। शासन प्रणाली
और राज कर्मचारियों में अनेक उलट फेर हुए। प्रजा पर अब नित्य
नए अत्याचार होने लगे। दुखित और बे सरदार की प्रजा ने नए
अमलदारों और उनके अत्याचारों के विरुद्ध बार बार विद्रोह किया
और सत्याग्रह किए, किन्तु अन्त को 'जिसकी लाठी उसकी भैंस।'
लूट खसोट और नई अमलदारी का नतीजा यह हुआ कि "थोड़े
दिन पहले जहाँ सुख और शान्ति विराजमान थी वहाँ अब दुख
और असन्तोष ने उसकी जगह ले ली।" दो साल बाद जब वारन
हेस्टिंग्स फिर बनारस गया तो उसे तमाम नगर उजड़ा हुआ
दिखाई दिया।* आबादी घटते घटते सन् १८२२ में केवल दो लाख
रह गई।
- "Misery and distraction took the place which had recently been
occupied by comfort and content . . . two years later, when Hastings
revisited the scene . . . he found it one of desolation."—Torrens'
Empire in Asia. p. 125.