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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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वारन हेस्टिंग्स २४६
अफ़सरों का अंगरेज़ होना और कम्पनी का उन पर अधिकार
रहना ज़रूरी था।
दो साल बाद महाराजा चेतसिंह को हुकुम मिला कि इसी
प्रकार एक पलटन सवारों की भी अपने यहाँ रक्खो। इस बार
उसने इनकार कर दिया। वारन हेस्टिंग्स केवल बहाना ढूंढ रहा
था। उसने फ़ौरन सेना सहित बनारस पर चढ़ाई की। चेतसिंह
ने आगे बढ़ कर बक्सर में वारन हेस्टिंग्स से भेंट की और
अपनी अधीनता प्रकट करने के लिए अपनी पगड़ी उतार कर
वारन हेस्टिंग्स के पैरों पर रख दी। फिर भी वारन हेस्टिंग्स
न रुका। उसने सीधे बनारस पहुँच कर चेतसिंह के महल को
घेर लिया और रेजिडेन्ट को आज्ञा दी कि चेतसिंह को क़ैद कर
लिया जावे।
बनारस की प्रजा इस अंधेर को देख कर भड़क उठी। वहाँ के
लोगों में अभी जान बाक़ी थी। वे कम्पनी की सेना पर टूट पड़े।
तुरन्त तमाम अंगरेज़ सिपाही एक एक कर क़त्ल कर डाले गए।
बदला लेने के लिए अब और अधिक सेना भेजी गई। ख़ूब घमासान
युद्ध हुआ।
रात को चेतसिंह के कुछ नौकरों ने जब यह देखा कि बनारस
का क़िला शत्रु के हाथों में पड़ने वाला है तो अपनी पगड़ियों की
रस्सी बना कर उसके ज़रिए महाराजा चेतसिंह को महल की एक
खिड़की से नीचे उतार दिया। गंगा के उस पार रामनगर के क़िले
में चेतसिंह का मुख्य ख़ज़ाना था। चेतसिंह अपनी माता और