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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 507

वारन हेस्टिंग्स २४७
“लॉर्ड” की उपाधि दी गई। उसी क्लाइव के उत्तराधिकारी के समय
में एक स्वतन्त्र भारतीय शासक को जालसाज़ी के झूठे इलज़ाम में
फाँसी पर लटका दिया गया !
वारन हेस्टिंग्स ३ साल गवरनर और १० साल गवरनर जनरल
रहा। उसका सारा शासन काल भारतीय प्रजा और भारतीय
नरेशों के साथ घोरतम अन्यायों से भरा हुआ था। मराठों और
हैदरअली के साथ उसकी लड़ाइयों का ज़िक्र दूसरे अध्यायों में
किया जायगा। बंगाल और उत्तरीय भारत के उसके समस्त
अत्याचारों को बयान कर सकना भी इस पुस्तक में असम्भव है।
इसलिए उसके उत्तरीय भारत के केवल दो और ज्वलन्त कृत्यों को
यहाँ पर संक्षेप में बयान किया जाता है।
इनमें पहली घटना बनारस की है। बनारस की समृद्ध रियासत
बनारस की समृद्ध उस समय अवध के नवाब के अधीन थी, किन्तु
रियासत अवध के नवाब बनारस के महाराजा से अपना
मामूली वार्षिक ख़िराज वसूल कर लेने के अलावा
और किसी तरह का हस्तक्षेप उस रियासत के आंतरिक शासन में
न करते थे।
इतिहास लेखक टॉरेन्स लिखता है—“बनारस का महाराजा
बलवन्तसिंह बड़ा अच्छा शासक था। × × × उसकी प्रजा सुखी
थी और देश ख़ुशहाल था। × × × किसानों को न बेजा माँग का
डर रहता था और न किसी तरह की ज़बरदस्ती का। वे अपने
खेतों को बाग़ों की तरह जोतते थे और अपने अथक परिश्रम की