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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 451

पाँचवाँ अध्याय
फिर मीर जाफ़र
७ जुलाई सन् १७६३ को कलकत्ते के अंग्रेज़ों ने समस्त बंगाल,
बिहार और उड़ीसा में यह एलान प्रकाशित कर
[हाशिया: अंग्रेज़ों की ओर] दिया कि ‘मीर मोहम्मद क़ासिमअली ख़ाँ’ के
[हाशिया: से एलान] जुल्मों के कारण उन्हें सूबेदारी की मसनद से
उतार कर उनकी जगह ‘मीर मोहम्मद जाफ़रअली ख़ाँ बहादुर’
को फिर से मसनद पर बैठा दिया गया है। इसी एलान में सब
सरकारी कर्मचारियों और प्रजा से अपील की गई कि आप लोग
“मीर मोहम्मद जाफ़रअली ख़ाँ बहादुर की मदद के लिए उनके
झंडे के नीचे आकर जमा हो जावें, ताकि मीर मोहम्मद जाफ़र
अली ख़ाँ बहादुर क़ासिमअली ख़ाँ के प्रयत्नों को निष्फल करके
अपनी सूबेदारी को पक्का कर सकें।”