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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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मीर जाफ़र १४५
इससे सरकारी आमदनी का बड़ा मद टूट गया और मुर्शिदा-
बाद दरबार की माली और राजनैतिक स्थिति को और अधिक
धक्का पहुँचा। नवाब और उसकी प्रजा के साथ यह ज़बरदस्त
अन्याय था। किन्तु कम्पनी के लिए आमदनी का और जैसा आगे
चल कर साबित हुआ जालसाज़ी का एक बहुत बड़ा नया मद
खुल गया।
कम्पनी को इस तरह जो कुछ लाभ हुआ उसके अलावा मीर
क़ासिम ने इस अहसान के बदले में वन्सीटार्ट और उसके साथियों
को बीस लाख रुपए नक़द बतौर नज़राने के भेंट किए।
अनेक इतिहास लेखकों ने कड़े शब्दों में मीर जाफ़र के साथ
अंग्रेज़ों के इस विश्वासघात की आलोचना की है। इतिहास
लेखक टॉरेन्स लिखता है :—
“उन लोगों तक में, जिन्होंने यूरोपनिवासियों को दिखाने के लिए
यूरोपवालों के एशियाई करतूतों पर मुलम्मा फेरने की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर
ले रक्खी है, इस अन्याय को प्रायः कोई भी क्षम्य नहीं कहता। मीरजाफ़र
x x x और कम्पनी के बीच मित्रता की क़समें खाई जा चुकी थीं और
वह मित्रता ख़ून से पक्की की जा चुकी थी। और यदि कभी भी ईमानदारी
का कम से कम ऊपरी रूप बनाए रखना मनुष्य के लिए ज़रूरी था
तो इस मामले में कलकत्ते के गवर्नर और उसकी कौन्सिल को इतनी
शर्म होनी चाहिये थी। किन्तु इस पर भी उस दो लाख पाउण्ड के बदले
जो उन्हें व्यक्तिगत हैसियत से मिले और उन तीन ज़रखेज़ इलाक़ों के बदले
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