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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 391

मीर जाफ़र १३६
हाथ तमाम मामले का फ़ैसला कर दें। अन्त में बूढ़ा मीर जाफ़र इस दर्जे
थका हुआ मालूम हुआ कि अंगरेज़ों को मजबूर होकर उसे आराम करने और
फिर विचार करने के लिए अपने महल लौटने की इजाज़त देनी पड़ी।
अंगरेज़ों ने यह भी देख लिया कि बिना थोड़ी बहुत ज़बरदस्ती किए मीर
जाफ़र राज की बाग मीर क़ासिम के हाथों में देने के लिए राज़ी न होगा।
मीर जाफ़र के जाने के दो घंटे बाद मीर क़ासिम वहाँ पहुँचा। मीर क़ासिम
इस समय मीर जाफ़र के सामने जाने से डरता था। १६ ता० मीर जाफ़र
को विचार करने के लिए दी गई, किन्तु उस दिन मीर जाफ़र की तरफ़ से
कोई जवाब न मिल सका। फ़ौरन् वन्सीटार्ट और उसके साथियों ने ज़बर-
दस्ती करने का निश्चय किया। १६ की रात को महल के अन्दर किसी त्यौहार
की तक़रीब में दावत थी। तमाम लोग थक कर सोए हुए थे। अंगरेज़ों ने
उस मौक़े को बहुत ग़नीमत समझा। चुपचाप रात को तीन बजे करनल
केलो ने दो कम्पनी गोरों की और छै कम्पनी काले सिपाहियों की लेकर नदी
को पार किया और पौ फटते फटते मीर क़ासिम और उसके कुछ आदमियों
को साथ लेकर मीर जाफ़र को महल के अन्दर सोते हुए जा घेरा। सब
काररवाई अच्छी तरह गुप्त रक्खी गई, चूँकि महल के अन्दर के सहन के
फाटक बन्द थे इसलिए केलों ने बाहर के सहन में अपने सिपाहियों को खड़ा
कर दिया। मीर जाफ़र के पास वन्सीटार्ट का एक पत्र भेजा गया। मीर जाफ़र
पत्र पढ़कर एकबार क्रोध से भर गया। उसने मुक़ाबले का इरादा ज़ाहिर
किया। क़रीब दो घंटे तक संदेश आते जाते रहे। अन्त में अपनी बेबसी
को पूरी तरह अनुभव कर मीर जाफ़र ने मीर क़ासिम को बुलवा भेजा और
मसनद उसके सुपुर्द कर देने की रज़ामन्दी ज़ाहिर की।