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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 382

१३० भारत में अंगरेज़ी राज
गुप्त पत्र व्यवहार शुरू हो गया था। जुलाई में गवर्नर वन्सीटार्ट के
आने पर इस षड्यन्त्र ने शक्ल ली । हॉलवेल और केलो के उस
समय के बयानों में मीरन की मृत्यु का साफ़ इस तरह ज़िक्र आता
है, जिससे मालूम होता है कि मोरन की हत्या इसी षड्यन्त्र
का एक अंग थी। सितम्बर सन् १७६० में इस षड्यन्त्र को
अन्तिम रूप देने के लिए और मीर जाफ़र से छेड़ छाड़ शुरू करने
का बहाना ढूंढ़ने के लिए वन्सीटार्ट के सभापतित्व में कलकत्ते
में कई गुप्त सभाएँ हुईं । ११ सितम्बर की सभा की काररवाई
में दर्ज है :—
“करनाल क्लाइव की क्रांति से आज तक समय समय पर हमारा प्रभाव
कम्पनी की धन और बढ़ता गया है और उस प्रभाव को क़ायम रखने
धरती की प्यास के लिए हमें वैसे वैसे ही अपना सैन्यबल भी बढ़ाना
पड़ा है। अब हमारे पास एक हज़ार से ऊपर यूरोपियन
सिपाही और पाँच हज़ार हिन्दोस्तानी सिपाही हैं। इनका ख़र्च और
उसके साथ साथ सेना का ग़ैर मामूली ख़र्च मिलाकर इतना अधिक है कि जो
जागीरें हमें मिली हुई हैं उनकी सालाना आमदनी से किसी तरह पूरा नहीं
हो सकता । X X X
X X X X
“इसलिए नवाब से कहना चाहिये कि आप इससे कहीं ज़्यादा
सालाना आमदनी कम्पनी के नाम कर दें और इसके पूरे पूरे और ठीक ठीक
प्रबन्ध के लिए इस तरह के कुछ ज़िलों का अनन्य अधिकार कम्पनी को
दे दें जिनका हम बहुत आसानी से इन्तज़ाम कर सकें । x x x हम