भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 379, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंमीर जाफ़र १२७
"दरबार में एक दल खड़ा हो गया था जिसके नेता नवाब का बेटा
मीरन और राजा राजवल्लभ थे। ये लोग अंगरेज़ों के जुए को अपने कंधों पर
से हटाने के लिए रोज़ तदबीरें सोचा करते थे और लगातार नवाब पर
ज़ोर देते रहते थे कि जब तक यह न हो सकेगा, तब तक नवाब की हुकूमत
केवल एक नाम की हुकूमत रहेगी।"*
समस्त सेना को पटने लौटा लाया गया और पटने लौट आने
तक मीरन की मृत्यु को उसकी सेना से छिपाकर रक्खा गया।
बंगाल और वहाँ की प्रजा की हालत इस समय अत्यन्त शोक
जनक थी। मुसलमान इतिहास लेखक मौ०
बंगाल की बदरुद्दीन अहमद उस समय की हालत को बयान
दर्दनाक हालत करते हुए लिखता है :—
"कम्पनी और उसके ख़ास ख़ास मुलाज़िमों से अलग अलग जो बड़े
बड़े वादे कर लिए गए थे, उन्हें पूरा करने में नाज़िम (मीर जाफ़र) के ख़जाने
का एक एक सिक्का दिया जा चुका था। बंगाल दिवालिया हो चुका था और
तेज़ी के साथ अराजकता की ओर बढ़ा चला जा रहा था। शाहज़ादे की चढ़ाई
से वहाँ की हालत और भी ख़राब हो गई थी, उससे नाज़िम की पूरी बेबसी
ज़ाहिर हो गई थी और कम्पनी को पता चल गया था कि बाहर के हमलों से
अपने इलाक़े की रक्षा करने के लिए नाज़िम हर तरह हमीं पर निर्भर है।"†
- "A party was soon raised at the Durbar, headed by the Nawab's son,
Miran, and Raja Rajebullab, who were daily planning schemes to shake off
their dependence on the English, and continually urging to the Nawab, that
until this was effected his government was a name only":—First Report, 1772,
Appendix 9, p. 225.
† Calendar of Persian correspondence, vol. iii, p. viii.