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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 376

१२६ भारत में अंग्रेज़ी राज
लड़ाई हुई, किन्तु केलो का बयान है कि मीरन ने इस काम में
अंगरेज़ों को मदद न दी, इसीलिए अंगरेज़ पूर्णिया के नवाब पर
विजय प्राप्त न कर सके। दो जुलाई तक केलो और मीरन की सेनाएँ
साथ साथ नवाब पूर्णिया की सेना के पीछे पीछे चलती रहीं।
खुद्दामहुसेन पर दोबारा अकेले हमला करने की केलो की हिम्मत न
थी और मीरन इस में केलो का साथ देने को किसी तरह राज़ी न
था। केलो और मीरन में वैमनस्य बढ़ा। २ जुलाई की आधी रात
को मीर ज़ाफ़र का बेटा और मुर्शिदाबाद का युवराज मीरन एका-
एक अपने बिछौने पर मरा हुआ पाया गया। कह दिया गया कि
मीरन पर बिजली गिर पड़ी। सुप्रसिद्ध अंगरेज़ विद्वान एडमंड
बर्क ने पार्लिमेण्ट के सामने बड़ी सुन्दरता के साथ दिखलाया कि
यह कैसी विचित्र बिजली थी। जिस ख़ेमे के नीचे मीरन सो रहा
था उस पर या उसके कपड़े पर बिजली का ज़रा सा भी असर नहीं
हुआ और उसके नीचे सोया हुआ मीरन मर गया। बिजली के
गिरने की आम तौर पर बड़ी ज़बरदस्त आवाज़ होती है जो मीलों
तक सुनाई देती है। किन्तु जो बिजली मीरन पर गिरी उससे ख़ेमे
के चारों ओर सोए हुए लाखों सिपाहियों और दूसरे आदमियों में
से किसी एक की भी आँख न खुली। मीरन उस समय सचमुच
अंगरेज़ों के पहलू में एक काँटा था। इसमें कोई सन्देह नहीं हो
सकता कि मीरन को मार डाला गया और इस हत्या में कर्नल
केलो का ख़ास हाथ था। इस हत्या के ठीक एक महीने बाद हॉल-
वेल ने नये गवरनर वन्सीटार्ट को लिखा :—