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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 375

मीर जाफ़र १२५
कर्नल केलो स्वयं मीर जाफ़र और मीरन की सेनाओं के साथ
[शाह आलम की] उन्हीं के ख़ेमों में ठहरा रहा और कप्तान नॉक्स
[अनिश्चितता] को उसने कुछ सेना सहित पटने की ओर भेजा।
यह सब वृत्तान्त हम ने कर्नल केलो के बयान के
आधार पर दिया है। मीरन और मीर जाफ़र दोनों को इस प्रकार
नज़रबन्द रखने का एक सबब यह भी था कि अंगरेज़ों को डर था
कि कहीं मीरन और मीर जाफ़र अंगरेज़ों के खिलाफ़ सम्राट से न
मिल जावें, और सम्राट से अपनी बातचीत का अंगरेज़ उन्हें पता
तक लगने देना न चाहते थे। सम्राट की सेना के सामने या तो पहले
से कोई निश्चित कार्यक्रम न था और या शाह आलम को राजधानी
के ख़ाली होने के कारण दिल्ली लौटने की जल्दी थी। जो कुछ रहा
हो, दो बार पटने पर चढ़ाई करके कप्तान नॉक्स के पहुँचते ही न
जाने सम्राट और अंगरेज़ों में क्या बातचीत हुई कि सम्राट की सेना
शहर का मोहासरा छोड़कर दिल्ली की ओर लौट गई।
कहा जाता है कि पूर्णिया का नबाब ख़ुद्दामहुसैन, जिसे मीर
[मीरन की हत्या] जाफ़र ने दो साल पहले युगलसिंह की जगह
वहाँ का नवाब नियुक्त किया था, अब अपनी
सेना सहित मीर जाफ़र के ख़िलाफ़ सम्राट की सहायता के लिए
आ रहा था। केलो और मीरन उसके मुक़ाबले के लिए बढ़े। मीरन
पूर्णिया के नवाब से लड़ना न चाहता था, किन्तु अंगरेज़ मीरन
को पूर्णिया के नवाब से लड़ाकर पूर्णिया के नवाब का भी नाश
करना चाहते थे। कम्पनी की सेना और पूर्णिया की सेना में कुछ