भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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होता था। क्लाइव ने अब नवाब पर ज़ोर देकर शोरा तैयार कराने
का ठेका कम्पनी के नाम हासिल कर लिया, जिससे कम्पनी का
व्यापार और बढ़ गया।
मई सन् १७५८ ई० में क्लाइव मुर्शिदाबाद लौटा। कुछ दिनों
बाद मीर जाफ़र भी अपनी राजधानी वापस पहुँच गया।
थोड़े दिनों बाद मीर जाफ़र और रामनारायण दोनों पर एक
[हाशिया: शाहज़ादे अली-] और नई आफ़त टूटी। जिस तरह मीरन केवल
[हाशिया: गौहर की बिहार] नाम के लिए बिहार का नवाब बना दिया गया
[हाशिया: यात्रा] था उसी तरह एक अरसे से दिल्ली सम्राट् के
ज्येष्ठ पुत्र को नाम मात्र के लिए बंगाल, बिहार
और उड़ीसा का सूबेदार कहा जाता था। वास्तव में शहज़ादे का
यह खिताब केवल एक मान सूचक खिताब था और मुर्शिदाबाद के
क्रियात्मक सूबेदार सम्राट् के अधीन सूबेदारी के सब फ़र्ज़ अदा
करते थे। इस समय शहज़ादा अलीगोहर अपने खिताब को सार्थक
करने के लिए सेना सहित बंगाल की ओर बढ़ा। इसमें सन्देह
नहीं, बंगाल को हाल को बग़ावत, अंगरेज़ों और मीर जाफ़र के
अन्याय और प्रजा को शोकजनक हालत इन सब की ख़बर सम्राट्
के दरबार तक पहुँच चुकी थी, और शहज़ादे के आने का इन बातों
के साथ अवश्य कुछ न कुछ सम्बन्ध था। जो हो, मीर जाफ़र
शहज़ादे के आने का समाचार पाते हो डर गया, उसने क्लाइव से
मदद चाही। क्लाइव फ़ौरन एक ज़बरदस्त फ़ौज और मीरन को
साथ लेकर मुर्शिदाबाद से पटने की ओर बढ़ा। शहज़ादा उस