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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 335

सिराजुद्दौला ८५
" x x x
"आप यक़ीन रखिये कि यदि कोई शख़्स या गिरोह आपसे लड़ने
की कोशिश करेगा या आपसे दुश्मनी का व्यवहार करेगा तो मैं ख़ुदा की
क़सम खा चुका हूँ कि मैं आपकी मदद करूँगा। फ्रांसीसियों को मैंने
कभी एक कौड़ी भी नहीं दी और जो सेना मैंने हुगली भेजी है वह वहाँ के
फ़ौजदार नन्दकुमार के पास भेजी गई है। फ्रांसीसी कभी आपसे लड़ाई
छेड़ने का साहस न करेंगे और मैं विश्वास करता हूँ कि पुराने रिवाज को
क़ायम रखते हुए गंगा प्रांत के अंदर या उन प्रांतों में जिनका मैं सूबेदार हूँ,
आप भी किसी तरह की लड़ाई न छेड़ेंगे।"*
इसके बाद ज्योंही सिराजुद्दौला को मालूम हुआ कि मुझे
[हाशिया: अंग्रेज़ी सेना के अत्याचार] मदद देने के बहाने अंग्रेज़ी सेना कलकत्ते से
चलकर वास्तव में चन्दरनगर पर हमला करने
जा रही है, उसने फ़ौरन अंग्रेज़ों को लिख
भेजा—"मुझे अब आपकी मदद की ज़रूरत नहीं है।" किन्तु
नवाब की इस आज्ञा और अलीनगर की सन्धि दोनों के ख़िलाफ़
अंग्रेज़ी सेना नवाब के मुल्क और उसकी रिआया दोनों को रौंदती
हुई चन्दरनगर की ओर बढ़ी। मार्ग में स्थान स्थान पर उन्होंने
सिराजुद्दौला की भारतीय प्रजा पर ख़ूब जी खोलकर अत्याचार
किए। उधर अंग्रेज़ एलची वाट्स मुर्शिदाबाद में बैठा हुआ नित्य
नई शर्तें सिराजुद्दौला के सामने पेश कर रहा था। जब अंग्रेज़ी
सेना के अत्याचारों की ख़बर सिराजुद्दौला के कानों तक पहुँची तो

  • Ive's Voyages, pp. 124-125.