भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६४ भारत में अंगरेज़ी राज
( ३ ) अंगरेज़ों को अधिकार हो कि जिस तरह वे चाहें अपनी
आबादियों की क़िलेबंदी कर सकें।
( ४ ) कलकत्ते में कम्पनी की एक अपनी टकसाल क़ायम हो।
चौथी शर्त को स्वीकार करना सिराजुद्दौला के अधिकार से
बाहर था। साम्राज्य भर में कहीं भी टकसाल क़ायम करना या
किसी को टकसाल क़ायम करने की इजाज़त देना केवल दिल्ली
सम्राट के अधिकार में था। पहली तीनों शर्तें सिराजुद्दौला ने मंजूर
कर लीं और चौथी के विषय में पत्र व्यवहार होता रहा। इस पत्र
व्यवहार में अंगरेजों ने और नई नई शर्तें नवाब के सामने पेश करनी
शुरू कीं। उनका असली उद्देश सिराजुद्दौला के साथ सुलह
करना नहीं था। उनका उद्देश सिराजुद्दौला को धोखा देकर बंगाल
में एक ज़बरस्त बग़ावत खड़ी करना था। इन लोगों ने सिराजुद्दौला
से कलकत्ते चलने की प्रार्थना की और उसे यह आशा दिलाई कि
कलकत्ते पहुँच कर सुलह की शर्तें तय हो जायँगी।
अंगरेज़ इस समय सिराजुद्दौला को धोखे से कलकत्ते लाकर
अचानक उस पर हमला करना चाहते थे। सुप्रसिद्ध
विश्वासघात मीर जाफ़र इस समय सिराजुद्दौला के साथ और
'उसके मुख्य सेनापतियों में से था। एस० सी० हिल लिखता है कि
सिराजुद्दौला को "अपनी इस यात्रा में मालूम हो गया था कि
मेरे अनेक सिपाही और कई अफ़सर तक मेरा साथ देने के लिए
तैयार नहीं हैं।"*
- Ibid, vol. i. p. cxlvii.