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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 301

में से केवल २३ ज़िन्दा बचे, और वह भी भयंकर अधमरी
हालत में।
किन्तु उस समय के इतिहास की खोज करने वालों पर अब
यह बात अच्छी तरह प्रकट हो चुकी है कि ब्लैक होल का यह
सारा क़िस्सा बिलकुल झूठा है और केवल सिराजुद्दौला के चरित्र
को कलंकित करने और अंगरेज़ों के बाद के कुचक्रों को जायज़
क़रार देने के लिए गढ़ा गया था।
विद्वान इतिहासलेखक अक्षयकुमार मैत्र ने अपने बंगला ग्रंथ
“सिराजुद्दोला” में इस क़िस्से के विरुद्ध अनेक अकाट्य युक्तियाँ
संग्रह की हैं। अव्वल तो इतनी छोटी (२६७ वर्ग फुट) जगह
में १४६ मनुष्य चावलों के बोरों की तरह भी नहीं भरे जा
सकते। इसके अलावा सैयद गुलाम हुसैन की “सियरउल-
मुताख़रीन” में या उस समय के किसी भी प्रामाणिक इतिहास में,
या कम्पनी के रोज़नामचों, “काररवाई के रजिस्टरों” या मद्रास
कौन्सिल की बहसों में इस घटना का कहीं ज़िक्र नहीं आता।
क्लाइव और वाट्सन ने कुछ समय बाद नवाब की ज़्यादतियों और
कम्पनी की हानियों को दर्शाते हुए नवाब के नाम जो पत्र लिखे,
उनमें इस घटना का कहीं ज़िक्र नहीं आता, न अलीनगर के संधिपत्र
में उसका कहीं नाम है। बहुत समय बाद क्लाइव ने कम्पनी के डाइ-
रेक्टरों के नाम एक लम्बा पत्र लिखा, जिसमें उसने सिराजुद्दौला के
साथ कम्पनी के क्रूर व्यवहार के अनेक सबब गिनवाए हैं। उनमें
इस घटना का कहीं इशारा भी नहीं मिलता। अंगरेज़ों ने अंत में मीर