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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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४२ भारत में अंगरेज़ी राज

ने अंगरेज़ों को आज्ञा दी कि किशनदास को वापस भेज दो, किन्तु
अंगरेज़ों ने साफ़ इनकार कर दिया।
इतने पर भी सिराजुद्दौला ने शांति से ही सब मामले का
निबटारा करना चाहा और क़ासिमबाज़ार की अंगरेज़ी कोठी के
मुखिया वाट्स को बुला कर समझाया कि "यदि अंगरेज़ शान्त
व्यापारियों की तरह देश में रहना चाहते हैं तो अब भी बड़ी खुशी
के साथ रहें, किन्तु सूबे के शासक की हैसियत से मेरा यह हुकुम
है कि वे फ़ौरन उन सब क़िलों को ज़मीन के बराबर कर दें, जो
उन्होंने हाल में बिना मेरी इजाज़त बना डाले हैं।"*
किन्तु अंगरेज़ व्यापारियों ने जिनकी आकांक्षाएँ बहुत बढ़ी हुई
थीं और जिनके षड्यंत्र इस समय दूर दूर तक पहुँच चुके थे, ज़रा
भी परवा न की। उनकी क़िलेबन्दियाँ और अधिक ज़ोरों के साथ
चलती रहीं। सिराजुद्दौला के पास अब सिवाय उन्हें दंड देने और
रोकने के और कोई चारा न था।
लाचार होकर सिराजुद्दौला ने २४ मई सन् १७५६ ई० को
[पार्श्व टिप्पणी: सिराजुद्दौला की] अंगरेज़ी कोठी को घेर लेने के लिए कुछ सेना
[पार्श्व टिप्पणी: अंगरेज़ों पर] क़ासिमबाज़ार भेजी। बावजूद क़िलेबन्दियों
[पार्श्व टिप्पणी: चढ़ाई] और तोपों के क़ासिमबाज़ार की कोठी सिरा-
जुद्दौला की सेना के सामने अधिक देर तक न
ठहर सकी। अंगरेज़ मुखिया वाट्स ने हार मान ली और कोठी
सिराजुद्दौला के सुपुर्द कर दी। वाट्स और कोठी के दूसरे अंगरेज़

  • Hastings' MSS. in the British Museum, vol. 29, p. 209.