भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४० भारत में अंगरेज़ी राज
भी क़िलेबंदी कर ली और कलकत्ते के क़िले के चारों तरफ़ एक
बड़ी खंदक खोद डाली।
(२) दिल्ली के सम्राट ने इन परदेशियों पर दया करके बंगाल
के अंदर उनके माल पर हर तरह की चुंगी माफ़ कर दी थी।
कम्पनी के दस्तख़ती पास से जिसे 'दस्तक' कहते थे, कम्पनी का
माल प्रान्त में जहाँ चाहे बिना महसूल आ जा सकता था। अब
इन लोगों ने इस अधिकार का दुरुपयोग शुरू किया और अनेक
हिन्दोस्तानी व्यापारियों से रुपए लेकर उनके हाथ अपने दस्तक
बेचने शुरू कर दिए, जिससे राज की आमदनी को ज़बरदस्त धक्का
पहुँचा। इसके अलावा जिस सम्राट ने इन विदेशियों के माल पर
महसूल माफ़ कर दिया था, उसी की देशी प्रजा का माल जब इन
विदेशियों की कोठियों में या उनकी बस्तियों में जाता था, तो
कम्पनी ने उस पर ज़बरदस्त चुंगी वसूल करना शुरू कर दिया
जिसका क़ानूनन् उन्हें कोई अधिकार न था।
(३) नवाब के जो मुलाज़िम या दरबारी किसी तरह का जुर्म
करते थे, या नवाब के ख़िलाफ़ बग़ावत करते थे, उन्हें अंगरेज़
कलकत्ते में बुलाकर अपनी कोठी में आश्रय देने लगे।
इन सब बातों की शिकायतें सिराजुद्दौला के कानों तक लगातार
और बाज़ाब्ता पहुँचती रहीं, फिर भी वह बरदाश्त करता रहा।
इतने में सिराजुद्दौला को मालूम हुआ कि अंगरेज़ पूर्निया के
नवाब शौकतजंग को सिराजुद्दौला से लड़ाकर उसे मुर्शिदाबाद की
मसनद पर बैठाने की तजवीज़ें कर रहे हैं। शौकतजंग सिराजुद्दौला