भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहमारा कर्तव्य २०७
चुका है। इसी एक मात्र अमोघ शक्ति का हमें अपने इस दुखित देश के
उद्धार के लिए आश्रय लेना होगा ।
तीसरी बात हमें यह भी स्पष्ट दिखाई दे रही है कि अपनी पराधीनता
के एक एक विभाग में हमारी ही शक्तियाँ हमारे विरुद्ध काम कर रही हैं।
विदेशी व्यापार के हर मह में, विदेशी शासन के हर मोहकमे में हम स्वयं
ही अपनी बेड़ियों के वास्तविक गढ़ने वाले हैं। बिना भारतवासियों की
सहायता के न विदेशी शासन भारत में क़ायम हो सकता था और न एक
क्षण के लिए इस समय चल सकता है। जाने या अनजाने, हमारा यह
स्वार्थ, हमारा यह पाप ही देश की समस्त वर्त्तमान आपत्तियों की जड़ है
और उसी के द्वारा ये आपत्तियाँ क़ायम हैं। इलाज स्पष्ट है। हमें अपने
विनाश के साधनों से सहयोग करने के इस महापाप से अपने को मुक्त
करना होगा ।
निस्सन्देह मार्ग सर्वथा निष्कण्टक नहीं है। किन्तु संसार का कोई भी
महान कार्य बिना स्वार्थत्याग और कष्टसहन के सिद्ध नहीं हो सकता। कोई
मनुष्य या राष्ट्र बिना अपने पिछले पापों का प्रायश्चित किए धर्म और
कल्याण के मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सकता । भारत के राजनैतिक उद्धार
का इस समय यही एक मात्र मार्ग है। हर भारतवासी के लिए सच्चे कर्त्तव्य
पालन का यही एक मात्र पथ है ।
हमारा भविष्य
जिस तरह हर मनुष्य से उसी तरह हर राष्ट्र से अपने जीवन में भूलों
का होना स्वाभाविक और अनिवार्य है। अपनी इन भूलों के दुष्परिणाम
भी हर व्यक्ति या राष्ट्र को सहने ही पड़ते हैं। किन्तु भविष्य के लिए