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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 240, कुल 727 में से

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पृष्ठ 240

२०६ पुस्तक प्रवेश
नींवों पर क़ायम कर लिया होता, यदि औरंगज़ेब के समय से पृथक
पृथक धर्मों के झूठे भेदों ने फिर से देशवासियों के विचारों को पथभ्रष्ट
न कर दिया होता, तो आज इस देश की यह दशा होना असम्भव था।
और किसी भी तरह का सुधार, सामाजिक या राजनैतिक, केवल रोग
की जड़ों को छोड़ कर पत्तियों और डालियों के साथ काट छाँट करना है।
इस तरह का कोई सुधार चिरस्थाई नहीं हो सकता। वास्तव में यदि
सत्य है तो यही है और यदि भारत के या संसार के भावी कल्याण का कोई
सच्चा मार्ग है तो यही है।
सत्याग्रह और असहयोग
इसके साथ साथ हमें प्रेम और सत्य के पवित्र सिद्धान्तों से न डिगते
हुए राजनैतिक क्षेत्र में 'सत्याग्रह' की अजेयता को अनुभव करना होगा और
सत्याग्रह के अनन्त बल का अपने अन्दर संचार करना होगा। हमें यह
समझना होगा कि हर अन्याय अन्यायी और अन्याय पीड़ित दोनों की
आत्माओं के एक समान पतन का कारण होता है। कोई सच्चा प्रेमी किसी
अन्याय को अपनी आँखों के सामने देखते हुए निश्चेष्ट नहीं बैठ सकता।
घृणा और द्वेष की अपेक्षा प्रेम, सच्चा और क्रियात्मक प्रेम, एक कहीं अधिक
प्रबल शक्ति है। जो मनुष्य किसी भी अन्याय को दूर करने के लिए सच्चे
प्रेम के साथ अपने स्वार्थ, अपने सर्वस्व और अपने प्राणों की आहुति देने
के लिए प्रस्तुत हो जाता है और हँसते हँसते कर्तव्य के नाम पर अनन्त
कष्टों का सामना करने के लिए मैदान में निकल पड़ता है, उसकी शक्ति
तोपों और बन्दूकों की शक्ति के मुक़ाबले में सर्वथा अजेय होती है। इस
शक्ति का थोड़ा बहुत अनुभव हमें अपने हाल के राष्ट्रीय संग्रामों में मिल