भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०४ पुस्तक प्रवेश
अर्वाचीन यूरोप इस समय एक कठिन परीक्षा के तसविष्य में से निकल
रहा है।
इसके विपरीत जिन नैतिक आदर्शों पर प्राचीन भारत और प्राचीन
चीन जैसे देशों ने अपने सामाजिक जीवन को कायम किया था उन आदर्शों
के सहारे ये देश हज़ारों साल तक सुख चैन से रह सके और कम या ज़्यादह
अपने से सम्बन्ध रखने वाले संसार के अन्य देशों को भी सुख चैन से
रख सके।
ऐसी हालत में हमें सब से ज़्यादह ध्यान इस बात का रखना होगा
कि हम अपने आज़माए हुए और मानव समाज के लिए कहीं अधिक
कल्याणकर आदर्शों को हाथ से न खो बैठें। जो स्थान भटके हुए यूरोप ने
आज बिजली और कूटनीति को दे रक्खा है वह हमें मानवप्रेम और सत्यता
को देना होगा, और हर मनुष्य के व्यक्तिगत 'अधिकारों' पर ज़ोर देने के
स्थान पर हमें मनुष्यमात्र के लिए 'कर्तव्यपालन' को अधिक महत्व
देना होगा।
एक मानवधर्म की आवश्यकता
इसके बाद हमें अपने राष्ट्रीय रोग के जड़ों की ओर दृष्टि डालनी
होगी और साहस के साथ उन्हें अपने जीवन से उखाड़ कर फेंकना
होगा। असत्य को छोड़ कर हमें फिर से अपने राष्ट्रीय जीवन को सत्य
की नींव पर कायम करने का महान प्रयत्न करना होगा। हमारा पथ
इस विषय में बिलकुल स्पष्ट है। आज से पौने तीन सौ साल पहले जिस
मार्ग से विचलित हो जाने के कारण धीरे धीरे हमारी राष्ट्रीय विपत्तियों का