भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहमारा कर्त्तव्य २०९
में डाल दिया, और जिसके विषय में उस समय के गवर्नर जनरल को
स्वीकार करना पड़ा कि 'उस आन्दोलन की सफलता में केवल एक इंच
की कसर बाक़ी रह गई थी,' और 'मैं हैरान और परेशान था,' * केवल
१५ साल का ।
ब्रिटिश साम्राज्य की हालत
स्वयं इंगलिस्तान के ऊपर रोमन लोगों की हुकूमत चार सौ साल तक
जारी रही । उसके बाद सदियों नॉर्मेन जाति के लोगों ने इंगलिस्तान को
अपने अधीन रक्खा । इंगलिस्तान निवासियों को रोमन लोगों या नॉर्मेन
लोगों के राजनैतिक चंगुल से अपने को मुक्त करने में, आइरिश जाति को
अंगरेज़ों के पंजे से अपने को आज़ाद करने में, अमरीका को इंगलिस्तान
का जुआ अपने ऊपर से उखाड़ कर फेंकने में, इतालिया को ऑस्ट्रिया की
पराधीनता से छुटकारा पाने में या अपने ही देश में रूस को ज़ार की
अत्याचारी सत्ता का अन्त करने में यदि ध्यान से देखा जाय तो इससे
कम समय नहीं लगा । भारत जैसे प्राचीन और विशाल देश का अपने
प्रियतम आदर्शों के विरुद्ध नई परिस्थिति के अनुसार अपने जीवन को ढाल
सकना और इस नए ढंग के संग्राम के लिए अपने तईं सुसन्नद्ध कर सकना
आसान काम नहीं है । फिर भी इसमें किसी को सन्देह नहीं हो सकता कि
इस विषय में भारत की जनता के अन्दर जागृति और तत्परता दिन प्रति-
दिन वेग के साथ बढ़ती जा रही है । हर नया आन्दोलन पिछले आन्दोलन
की अपेक्षा हमें साफ़ सैकड़ों क़दम आगे पहुँचा देता है । दूसरी ओर जिन
- 'His programme came within an inch of success, ' 'I stood puzzled
and perplexed,'—Lord Reading at Calcutta on the Non-Cooperation Move-
ment of 1921.