भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुग़लों का समय १६५
में भी अधिकतर भारत का बना हुआ माल ही दिखाई देता था। आज से
क़रीब सवा सौ साल पहले तक यानी उन्नीसवीं सदी के शुरू तक भारत के
बने हुए जहाज़ उस समय के इङ्गलिस्तान और अन्य यूरोपियन देशों के बने
हुए जहाज़ों से कहीं अधिक सुन्दर, कहीं अधिक मज़बूत और कहीं अधिक
टिकाऊ होते थे। ❀
ईसा की पन्द्रवीं सदी में यूरोपियन यात्री काउण्टी लिखता है कि
जितने बड़े जहाज़ भारत में बनते थे उतने यूरोप में कहीं देखने को न
मिलते थे। मुग़ल साम्राज्य के शुरू के दिनों में जो अङ्गरेज़ भारत आए
उन्होंने और भी अधिक बड़े बड़े सुन्दर और मज़बूत भारतीय जहाज़ों का
हाल अपने यात्रा वृत्तान्तों में लिखा है। मुग़ल साम्राज्य के दिनों में चीन
और जापान से लेकर अफ़रीका के दखिन तक जितने जहाज़ आते जाते थे,
उनमें से अधिकांश भारत के और ख़ास कर गुजरात के बने हुए होते थे।
बङ्गाल से सिन्ध तक का सारा व्यापार केवल भारतीय जहाज़ों द्वारा किया
जाता था। मुसाफ़िरों के आने जाने के लिए जितने बड़े जहाज़ भारत में
बनते थे उतने और कहीं न बनते थे। पूरब में मेक्सिको ( अमरीका ) तक
और पच्छिम में इङ्गलिस्तान तक भारत का बना हुआ माल भारतीय
जहाज़ों में लद कर दूसरे देशों को जाता था। हज के लिए जाने वाले भार-
तीय मुसलमान भारतीय जहाज़ों ही में भारत से अरब तक आते जाते थे।†
बारबोसा लिखता है कि सत्रवीं सदी के शुरू में गुजरात के बने हुए
रेशम के कपड़े अफ़रीका और पगू तक जाते थे। वारथेमा लिखता है कि
- Prosperous British India, by William Digby, pp. 86, 88.
† India at the Death of Akbar, pp. 67-71.