भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५४ पुस्तक प्रवेश
यह बयान एक विद्वान् यूरोपियन यात्री का है, जिसने औरङ्गज़ेब के
समय में स्वयं मुग़ल साम्राज्य की हालत को देखा था। हर कोतवाल की
सनद में लिखा होता था कि तुम्हारी यह ज़िम्मेदारी है कि तुम्हारे शहर में
कोई चोरी न होने पाए, शहर के लोग सुरक्षित रहें, और अमन के साथ
अपने व्यापार आदिक कर सकें।
हर इलाके के लिए एक, 'मुहतसिब' होता था, जिसका ख़ास काम यह
होता था कि शहर की हर गली में जाकर शराब बनने और बिकने के स्थानों,
जुआख़ानों आदि को ज़बरदस्ती बन्द कर दे। शायद हिन्दू साधुओं की
प्रथा का ख़याल करते हुए सूखे मादक द्रव्यों जैसे गाँजा, भाँग इत्यादि की
इतनी कड़ी मनाही न थी। मुहतसिब की हिदायतों में लिखा होता था कि
“शहरों के अन्दर शराब इत्यादि मादक द्रव्यों के बिकने की इजाज़त न
दो और न 'तवायफ़ों' को शहरों के अन्दर रहने दो।”*
शराब बन्दी
इतिहास लेखक मोरलैण्ड लिखता है कि सम्राट अकबर ने साम्राज्य
भर के शहर कोतवालों को यह आज्ञा दे दी थी कि बिना किसी के घर में
ज़बरदस्ती घुसे, शराब का बनना जहाँ तक सम्भव हो बन्द करा दिया जाय,
इसके बाद सम्राट जहाँगीर ने शराब का बनाना क़ानूनन बन्द कर दिया,
किन्तु शाहजहाँ के समय में इस आज्ञा का बहुत अधिक कड़ाई के साथ
पालन कराया गया।† औरङ्गज़ेब के समय में भी यह कड़ाई जारी रही।
- Mughal Administration, by Jadunath Sarkar, p. 41.
† India at the Death of Akbar, by Moreland, p. 159.