भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुग़लों का समय १५३
'अबवाब' की वसूली के ख़िलाफ़ आज्ञाएँ फ़ीरोज़शाह तुग़लक़ (सन्
१३७२) के समय से सम्राट् अकबर (१५६०) के समय तक और उसके
बाद क़रीब क़रीब हर मुग़ल सम्राट् के समय में बराबर जारी होती रहती थीं।
मुग़ल सम्राट् अपनी विशाल प्रजा के सुख दुख से बेख़बर भी न रहते
थे। मुग़ल समय में 'वाक़े नवीसों', 'सवाने नवीसों', 'अख़बार नवीसों',
'ख़फ़िया नवीसों' इत्यादि का एक ज़बरदस्त मोहकमा था, जिसके ज़रिए
साम्राज्य के कोने कोने की ख़बरें दिल्ली सम्राट् के कानों तक पहुँचती
रहती थीं।
निस्सन्देह किसानों के सुख और उनकी समृद्धि का भारत के लिखे हुए
इतिहास में किसी समय भी इतना अच्छा और व्यवस्थित प्रबन्ध न था
जितना मुग़ल सम्राटों के समय में। यही वजह है कि उस समय के अनेक
यूरोपियन और अन्य यात्री भारतीय ग्रामों की खुशहाली की मुक्तकण्ठ से
प्रशंसा करते हैं और लिखते हैं कि संसार के अन्य किसी भी देश में उस
समय किसानों की हालत इतनी अच्छी न थी। *
कोतवाल के कर्त्तव्य
मुग़ल साम्राज्य के अन्दर हर शहर में अन्य कर्मचारियों के अलावा एक
कोतवाल होता था, जिसके कामों में से एक काम यह भी होता था—
“कोतवाल का यह काम है कि शराब का खिंचना बिलकुल
बन्द कर दे। वह इसके लिए ज़िम्मेदार होता है कि शहर में कोई
वेश्या न रहे × × ×”†
- e. g. Bengal in 1756-57, by S. C. Hill, vol. i.
† Manucci, vol ii, pp. 420, 421.