भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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की खूब तारीफ़ें की हैं और ईश्वर को "अल्लाह ला मकाँ" बताया है । गुलाल,
भीका और पल्टूदास के कोई कोई पद्य कविता, भाव और भक्तिरस, तीनों
की दृष्टि से अत्यन्त उच्च कोटि के हैं। इन सब में सूफ़ी परिभाषाएँ भरी
हुई हैं। ख़ुदा को उन्होंने प्रायः 'हक़' (सत्य) कह कर पुकारा है।
पल्टूदास का एक पद है—
पूरब में राम है पच्छिम खुदाय है,
उत्तर औ दक्खिन कहो कौन रहता ।
साहिब वह कहाँ है, कहाँ फिर नहीं है,
हिन्दू औ तुरुक तोफ़ान करता ॥
हिन्दू औ तुरुक मिलि परे हैं खँचि में,
अपनी बर्ग दोउ दोन बहता ।
दास पलटू कहै साहिब सब में रहै,
जुदा ना तनिक मैं सांच कहता ॥
यानी—यदि राम पूरब में है और ख़ुदा पच्छिम में है, तब फिर उत्तर
और दक्खिन में कौन रहता है ? ख़ुदा कहाँ है और कहाँ नहीं है ? हिन्दू
और मुसलमान व्यर्थ तूफ़ान खड़ा करते हैं । हिन्दू और मुसलमान लड़ते'हैं
और दोनों मज़हबों को एक दूसरे के विरुद्ध खँचते हैं । दास पलटू सच
कहता है, ख़ुदा सब में है, वह हरगिज़ बटा हुआ नहीं है । यही सच है।
सत्यपीर की पूजा
जिस तरह उत्तर भारत में हिन्दू और मुसलमानों के धार्मिक मेल की
लहरें चल रही थीं, उसी तरह बङ्गाल और महाराष्ट्र में भी उनके अक्स
दिखाई देने लगे। बारहवीं सदी के बङ्गाल में हिन्दुओं का मुसलमानों की