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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 15

( ३ )
भारतीय कला और मुसलमान
निर्माण कला—दो कलाओं का आलिंगन—मुग़लों के समय में
भारतीय चित्रकला की उन्नति । पृष्ठ १३४-१३६
मुग़लों का समय
यूरोप पर मुग़लों के हमले—भारत पर मुग़लों के हमले—भारत
में एक केन्द्रीय सत्ता की ज़रूरत—मुग़लों द्वारा उसका निर्माण—
एक भाषा—एक शासन पद्धति—एक से सिक्के--इतिहास कला—दूसरे
देशों से सम्बन्ध—धार्मिक और सामाजिक एकता—ग्राम पंचायतें—
किसानों की अवस्था—मुग़लों की प्रजा पालकता—न्याय शासन—धार्मिक
उदारता—औरंगज़ेब के दस्तख़ती परवाने—शराब बन्दी—ग्राम पंचायतें—
उस समय का ईसाई यूरोप—भारत और यूरोप की तुलना—देशी भाषाओं
की उन्नति—साहित्य और विज्ञान की उन्नति—सम्राट अकबर—उस समय
की हिन्दू मुस्लिम संकीर्णता—दारा शिकोह और औरंगज़ेब—औरंगज़ेब
के बाद । पृष्ठ १३६-१८२
अंगरेज़ों का आना
उस समय के अंगरेज़ व्यापारी—उनकी सफलता के कारण—हमारी
पराजय के तीन कारण—दोनों के चरित्र में अन्तर—भारतवासियों के
चरित्र का नाश ! पृष्ठ १८४-१९८
हमारा कर्तव्य
भारतवासियों के लिये उपाय—अंगरेज़ी राज कब से—स्वाधीनता के
प्रयत्न—ब्रिटिश साम्राज्य की हालत—हमारे नैतिक आदर्श—एक मानव धर्म
की आवश्यकता—सत्याग्रह और असहयोग—हमारा भविष्य । पृष्ठ १९८-२०८