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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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मानव धर्म ११५

मेहर मसीत, सिद्क़ मुसल्ला, हक़ हलाल कुरआन,
शर्म सुन्नत, सील रोज़ा, होय मुसलमान ।
करनी काबा, सच पीर कलमा करम नेवाज़,
तसबीह सातिश भावसी नानक रक्खे लाज ।
यानी—दया को अपनी मसजिद बना, सच्चाई का मुसल्ला बना,
इन्साफ़ को अपनी कुरान बना, विनय को ख़तना समझ, सुजनता का रोज़ा
रख, तब तू सच्चा मुसलमान होगा । नेक कामों को अपना काबा बना,
सच्चाई को अपना पीर बना, परोपकार को कलमा समझ, ख़ुदा की मरज़ी
को अपनी तसबीह, तब ऐ नानक ! ख़ुदा तेरी लाज रक्खेगा ।
ठीक इसी तरह का उपदेश नानक ने हिन्दुओं को भी दिया ।
संयम और सदाचार पर नानक ने बहुत अधिक ज़ोर दिया है । अन्य
सूफ़ियों के समान नानक ने आत्मा की उन्नति के लिए गुरु को परमावश्यक
बताया है । सूफ़ियों की शरीयत, मारफ़त, उफ़्रवा और लाहूत के मुक़ाबले
में नानक ने धर्मखण्ड, ज्ञानखण्ड, कर्मखण्ड और सचखण्ड का उपदेश
दिया । इसमें कोई भी सन्देह नहीं कि नानक सूफ़ी साहित्य से पूरी तरह
परिचित था । उस साहित्य का उसने अपने पद्यों में भरपूर उपयोग किया
और उसी के आधार पर हिन्दू और मुसलमान दोनों को एक मालिक और
एक मार्ग का उपदेश दिया ।
मुग़ल साम्राज्य के अन्त के दिनों में, उस समय की शोकजनक परि-
स्थिति में नानक के अनुयाइयों ने बेहद पलटा खाया । वे नानक के
सार्वभौम सिद्धान्तों के अनुरूप न चल सके । किन्तु संसार के अधिकांश