सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 142, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 142

११४ पुस्तक प्रवेश
मालिक के दर पर लाखों मोहम्मद, ब्रह्मा, विष्णु, महेश और राम खड़े
लाखों तरीक़े से स्तुति करते रहते हैं ।
मोहम्मद साहब की तरह नानक ने भी ईश्वर की इच्छा पर अपने
आपको पूरी तरह छोड़ देने का उपदेश दिया ।
गङ्गास्नान, तीर्थयात्रा, जप, पूजा पाठ इत्यादि को नानक ने फ़जूल
बताया, अठारह पुराण और चारों वेदों को निरर्थक बतलाया, प्रतिमा पूजा
का विरोध किया, कबीर के समान राम के अवतार का खण्डन किया, और
जाति भेद को मिथ्या और हानिकर बताया ।
ऊँच नीच के विचार के विरुद्ध नानक ने कहा है—
ज़ोर न कीजे किसी पर, उत्तम मधम न कोय,
हिन्दू मुसलमान नूं, दोहाँ नसीहत होय ।
नीचाँ अन्दर नीच ज़ात, नीचे हाँ अत नीच,
जित्थे नीच सम्हालिए, उत्थे नज़र तेरी बख़्शीश ।
नीचाँ अन्दर नीच ज़ात, सतगुरु रहे बोलाय ।
यानी—किसी पर ज़बरदस्ती नहीं करनी चाहिए, कोई ऊँच नीच नहीं
है । हिन्दू और मुसलमान दोनों को यही नसीहत है ।
ईश्वर की बख़्शीश उन्हीं को मिलेगी जो नीचों से भी नीच को, और
सब से अति नीच को अपनाते हैं ।
सद्गुरु उन्हें बुलाते हैं, जो नीच से भी नीच जाति के समझे जाते हैं ।
मुसलमानों को उपदेश देते हुए नानक ने कहा—