भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमानव धर्म ११३
गुरु जी कहिया सुन अब्दुर्रहमान ।
दावा भूलो ताँ इक्क पिछान ।
हिन्दू जपते राम राम, मूसलमान खुदाय,
इको राम रहीम है, मन में देखो लाय ।
यानी—हिन्दू मुसलमान दोनों एक ख़ुदा के बन्दे हैं, किन्तु दोनों
बेईमान, एक राम का और दूसरा रसूल का, झूठा दावा करके लड़ते हैं ।
हम न हिन्दू हैं और न मुसलमान, इन दोनों के दिलों में शैतान
बसा है। गुरु नानक कहते हैं, ऐ अब्दुर्रहमान ! सुनो, ईश्वर एक ही है,
मत मतान्तरों की हठ छोड़ दो, तब उस एक ईश्वर को पहचान सकोगे ।
हिन्दू राम राम जपते हैं, मुसलमान ख़ुदा कहते हैं, किन्तु यदि अपनी
आत्मा के अन्दर ध्यान से देखोगे तो मालूम होगा कि राम और रहीम
एक ही हैं।
एक दूसरे स्थान पर—
तग्ग न हिन्दू पाइया, तग्ग न मूसलमान ।
दोए भूले राह ते, ग़ालिब भया शतान ॥
जित दर लख्ख मोहम्मदाँ, लख ब्रह्मा बिश्न महेश ।
लख लख राम वडीरिएँ, लख राहें लख वैश ।
यानी— मार्ग न हिन्दू को मिला और न मुसलमान को—दोनों मार्ग
से भटक गए, दोनों पर शैतान ग़ालिब हो गया ।