भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसमय से फिर एक बार उत्तर ने धार्मिक विचारों के क्षेत्र में शेष भारत का
नेतृत्व हाथ में लिया और कबीर ही के विचार अनेक सन्तों और महात्माओं
द्वारा एक बार उत्तर से दक्खिन तक समस्त भारत में फैलने लगे।
पञ्जाब के मुसलमान फ़क़ीर
जिस तरह शुरू की सदियों में दक्खिन भारत, उसी तरह पन्द्रवीं सदी
में समस्त पञ्जाब के नगर और गाँव मुसलमान सूफ़ियों और फ़क़ीरों से
भरे हुए थे। पानीपत, सरहिन्द, पाकपट्टन, मुलतान और उच्च में
अनेक प्रसिद्ध सूफ़ी शेख़ों ने अपनी ज़िन्दगियाँ गुज़ारीं, जिनमें बाबा फ़रीद,
अला उलहक़, जलालुद्दीन बुख़ारी, मख़दूम जहानियाँ, शेख़ इस्माइल
बुख़ारी, दाता गञ्जबख़्श इत्यादि के नाम अपनी सच्चाई और ईश्वरभक्ति के
लिए देश भर में प्रसिद्ध थे। जो ज़बरदस्त क्रान्ति इन महात्माओं ने देश-
वासियों के विचारों में उत्पन्न की, उसी का फल या फूल गुरु नानक का वह
सुन्दर प्रयत्न था जो उस महापुरुष ने ठीक कबीर ही के समान और उसी
की सरणी पर हिन्दू और मुसलमान धर्मों को मिलाने के लिए किया।
नानक
' गुरु नानक का जन्म सन् १४६६ ईसवी में वैशाख शुक्ला तृतीया को
हुआ था। उसने फ़ारसी और संस्कृत दोनों की शिक्षा पाई थी। नानक
नाम उन दिनों हिन्दू और मुसलमान दोनों का नाम होता था। कुछ
दिनों उसने नबाब दौलत ख़ाँ लोधी के यहाँ नौकरी की। तीस साल की
आयु में उसने फ़क़ीरी ली। अपने मुसलमान शिष्य मरदाना के साथ
उसने भारत, लङ्का, ईरान, अरब इत्यादि की यात्रा की। लिखा है कि
पानीपत के शेख़ शरफ़, मुलतान के पीरों, बाबा फ़रीद के उत्तराधिकारी