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सर्वकोश
भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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प्रीतिभक्तिरस [२५६
चाहें कर सकते हैं। चाहे लक्ष्मी देवी मुझसे सन्तुष्ट न हों, मैं जानता हूँ कि
आप सदा मेरी सेवा को स्वीकार करते रहेंगे।"
भगवान् की दिव्य प्रेममयी सेवा में अनुरक्त भक्त तीन प्रकार के
हो सकते हैं—शरणागत, भक्ति के ज्ञान में उन्नत, एवं पूर्ण रूप से सेवा-
परायण । ऐसे भक्त क्रमशः साधक, सिद्ध और नित्यसिद्ध कहलाते हैं।