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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 218, कुल 380 में से

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पृष्ठ 218

प्रेम के लक्षण (अनुभाव) [ १६१
अन्य लोगों की चिन्ता न करना
मथुरा के याज्ञिक ब्राह्मणों की पत्नियों ने जैसे ही सुना कि श्रीकृष्ण
निकट आए हैं, वे तुरन्त घर छोड़कर वहाँ चल पड़ीं। उन्होंने अपने विद्वान्
पतियों की ओर ध्यान नहीं दिया। पति आपस में कहने लगे, “श्रीकृष्ण
की रति में कैसा अद्भुत आकर्षण है जो ये स्त्रियाँ हमारी आज्ञा के बिना
ही श्रीकृष्ण के पास चली गयीं।” यह श्रीकृष्ण का प्रभाव है। श्रीकृष्ण की
ओर आकृष्ट भाग्यवान् जन्म-मृत्यु के बन्धन से मुक्त हो जाता है, जो उन
यज्ञपत्नियों द्वारा परित्यक्त बन्द घरों जैसा है।
पद्यावली में कोई भक्त कहता है, “हमें संसार के लोगों की चिन्ता
नहीं है। यदि वे हमारी निन्दा करते हैं तो किया करें। हम तो बस
हरेकृष्ण महामन्त्र के कीर्तनरूपी दिव्यरस का पान करेंगे और भूमि पर
लोटते हुए भावोन्मत्त नृत्य करेंगे। हमें परमानन्द सुलभ हो गया है।”
लार टपकाना
कभी-कभी हरेकृष्ण महामन्त्र जपते हुए नारदजी कुछ क्षण के लिए
सर्वथा निश्चेत हो जाते हैं और उनके मुख से लार टपकने लगती है।
उन्मत्त के समान अट्टहास करना
जब कोई भक्त पागल जैसा अट्टहास करता है, तो ऐसा हृदय में
प्रेम के विलक्षण विक्षेप के कारण होता है। अट्टहास हृदय की एक विशिष्ट
अवस्था को प्रकट करता है। इस मनोभाव से भक्त का प्रेम अधरों पर
फूट पड़ता है। लगता है कि हृदय में भक्तिलता खिल उठी है जिस कारण
मुख से अट्टहास रूपी पुष्पों का समुदाय बार-बार बिखर रहा है। चैतन्य
चरितामृत के अनुसार भक्ति वह लता है जो गोलोक वृन्दावन में श्रीकृष्ण
के चरणकमल तक बढ़ती है।
चक्कर आना
गोपी कहती है, “हे सखि मुरलि ! लगता है अधारि तुम्हारे भीतर
फूँक मारने के व्याज से आंधी का प्रवेश करा देते हैं, जो तुम्हारे सिर को
घुमाता है और अब कमलनयना गोपियों की भी वही दशा कर रहा है।”
हिचकी आना
कभी-कभी हिचकी भी कृष्णप्रेम का अनुभाव बन जाती है। इसके