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सर्वकोश
भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 380 में से

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पृष्ठ 207

अध्याय २६
प्रेम के उद्दीपन
जो श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम को उद्दीप्त करते हैं वे उद्दीपन विभाव
कहलाते हैं, जैसे भगवान् श्रीकृष्ण के दिव्य गुण, असाधारण चेष्टा, शृंगार,
मुस्कराहट, श्रीअंग की सौरभ, वस्त्र, माला; वंशी, शृंग, वेत्र, नूपुर, शंख,
चरणचिह्न, वृन्दावन आदि लीलास्थल, उनकी प्रिया तुलसी, कृष्णभक्त,
तथा उनकी स्मृति के दिवस। कृष्ण-स्मरण का एक दिन एकादशी है। उस
दिन सारे भक्त उपवास रखकर अहोरात्र भगवान् की कीर्ति का गान
करते हैं।
श्रीकृष्ण के दिव्य गुण, असाधारण चेष्टा और मधुर मुस्कान
श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों की तीन कोटियाँ हैं—कायिक, वाचिक और
मानसिक।
श्रीकृष्ण की वय, उनका दिव्य श्रीअंग, सौंदर्य तथा मृदुता उनके
कायिक गुण हैं। श्रीकृष्ण और उनके शरीर में भेद नहीं है, इसलिए उनके
कायिक गुण साक्षात् उन्हीं के स्वरूप हैं। ये भक्तों के प्रेम का उद्दीपन
करते हैं, इसीलिए उन्हें उस प्रेम का अलग से कारण बताया गया है।
श्रीकृष्ण के गुणों से आकृष्ट होना स्वयं श्रीकृष्ण से ही आकृष्ट होना है,
क्योंकि यथार्थ में श्रीकृष्ण और उनके गुणों में कुछ भी भेद नहीं है। श्रीकृष्ण
का नाम भी कृष्ण है, यश भी कृष्ण और परिकर भी कृष्ण है। श्रीकृष्ण
के प्रेम को उद्दीप्त करने वाली उनसे सम्बन्धित प्रत्येक वस्तु कृष्ण है।
परन्तु हमारी जानकारी के लिए इनका अलग विचार किया गया है।
श्रीकृष्ण अखिलरसामृतमूर्ति (आलम्बन) हैं; अतः कृष्णप्रेम के
उद्दीपन भिन्न प्रतीत होते हुए भी वास्तव में श्रीकृष्ण से भिन्न नहीं हैं।
कृष्ण के नाम, यश, गुण आदि कृष्णप्रेम के आलम्बन और उद्दीपन
दोनों हैं।
श्रीकृष्ण की वय कौमार, पौगण्ड और कैशोर—इस प्रकार तीन