भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचिकित्सा ] भाषाटीकासहिता । ४०९
जब पककर चौथाई भाग जल शेष रहजाय तब उतारकर छानलेवे । फिर उसमें गुड सौ पल डालकर मन्दमन्द अग्निसे पकावे । जब गुड अच्छे प्रकारसे पकजाय तब उसमें बिछौटी, काकोली, क्षीरकाकोली और जवाखार इन प्रत्येकका चूर्ण बीस तोले एवं हरड, त्रिकुटा, सज्जी, चीता और वच इन औषधियोंका चूर्ण समान भाग मिश्रित २० तोले, हींग और अम्लवेतका चूर्ण आठ आठ तोले मिलाकर सबको एकमएक करदेवे । इसको प्रतिदिन प्रातःकाल एक-एक तोलेकी गोली बनाकर अग्निके बलानुसार भक्षण करे ॥ १९५-२०० ॥
अजीर्णे जरयत्येष जीर्णे सन्दीschedule... -> सन्दीschedule wait -> सन्दीschedule (सन्दीschedule = सन्दीschedule -> सन्दीschedule):
अजीर्णे जरयत्येष जीर्णे सन्दीschedule
अजीर्णे जरयत्येष जीर्णे सन्दीschedule (let's write properly):
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