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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 689, कुल 788 में से

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पृष्ठ 689

परिशिष्ट
भगतसिंह की जेल नोटबुक : एक महान
विचारयात्रा का दुर्लभ साक्ष्य
एल. वी. मित्रोखिन
अक्टूबर, 1967 में एक वयोवृद्ध भारतीय क्रान्तिकारी विजय कुमार सिन्हा से मेरी
भेंट हुई। 1929 में अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें उस मुक़दमे में सज़ा दिलवायी थी, जो
इतिहास में लाहौर षड्यन्त्र केस के नाम से जाना जाता है। उन दिनों की घटनाओं
को याद करते हुए श्री सिन्हा ने महान भारतीय क्रान्तिकारी भगतसिंह के बारे में
बताया, जो फाँसी के तख़्ते पर चढ़ने से कुछ घण्टे पहले तक लेनिन की जीवनी
पढ़ते रहे थे।
कैसा अनुपम इच्छा-बल था उस वीर का! उन अकथनीय परिस्थितियों में,
फाँसी से पहले एक पुस्तक पढ़ना! परन्तु लेनिन के व्यक्तित्व का प्रभाव इतना
प्रबल था कि सुदूर औपनिवेशिक भारत में मृत्युदण्ड प्राप्त क़ैदी उनके जीवन का
वर्णन करने वाली पंक्तियों को यों पढ़ते थे, मानो जीवनदायी स्रोत से घूँट भर रहे
हों।
...सुबह का वक़्त था। इस दिन भगतसिंह तेईस वर्ष, पाँच महीने और छब्बीस
दिन के हुए थे। लाहौर का एक अख़बार देखते हुए भगतसिंह की नज़र हाल ही
में छपी लेनिन की जीवनी के बारे में एक लेख पर पड़ी।
लेनिन पर एक किताब...वह हर हालत में उसे पढ़ना चाहते थे। भगतसिंह जानते
थे कि औपनिवेशिक “न्यायालय” अपना फ़ैसला सुना चुका है और उन्हें फाँसी
मिलकर रहेगी। ये ऐसे क्षण होते हैं, जब आदमी की सबसे बड़ी इच्छा होती है कि
अपने प्रियजनों के अन्तिम दर्शन पा ले।
‘युगदृष्टा भगतसिंह और उनके मृत्युंजय पुरखे’ पुस्तक में भगतसिंह की
भतीजी वीरेन्द्र सिन्धु ने उनके अन्तिम दिनों का वर्णन इस प्रकार किया है। वह
लिखती हैं : “भगतसिंह के लिए लेनिन से अधिक क़रीबी और कौन था? वह
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 683