भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 602, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 48 (45 )
इण्टरनेशनल¹
उठ जाग प्रताड़ित धरती के
उठ जाग भूख के बन्दी
न्याय की बजती रणभेरी,
एक बेहतर दुनिया जन्मे।
अब बाँध सके ना हमको परम्परा की बेड़ी
अरे! उठो! गुलामो जागो! अब करनी नहीं गुलामी!
अब नयी नींव पर बनेगी दुनिया,
हम अब तक रहे न कुछ भी, अब सब कुछ होंगे। (टेक)
यह है अन्तिम संघर्ष
आओ होलें अविकल
कल मानवजाति बनेगी
इण्टरनेशनल।
देखो उनको जो बैठे हैं महिमामण्डित
रेलों, ख़ानों, धरती के राजा!
श्रम को ही रहे लूटते ये
बस इसके सिवा किया क्या है?
दफ़न हैं जनता की मेहनत के फल
कुछ की मज़बूत तिजोरियों में;
देना होगा इसे वापस
है यह जनता का हक़। (वही टेक)
एकजुट हों कारख़ानों-खेतों के मेहनतकश
पार्टी हम सबकी जो काम करें;
यह धरती है हमारी, जनता की,
यहाँ न जगह कामचोर की,
हमारे मांस पर हुए हैं कितने मोटे?
लेकिन यदि ये घृणित शिकारी पक्षी,
हमारे आसमान से एक सुबह हो जायें ग़ायब
सूरज की आभा तब भी बनी रहेगी।
(वही टेक फिर)
- यूजीन पोतिए द्वारा पेरिस कम्यून (1871) के दौरान फ्रेंच में लिखा गया यह गीत
इण्टरनेशनल नाम से विश्व सर्वहारा का संघर्षगीत बन गया।
596 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़