भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 599, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकॉम्टे¹ ने कहा है, “सच कहा जाये तो मज़दूर वर्ग एक वर्ग होता ही नहीं, बल्कि
वह तो समाज के निकाय का संघटक होता है।” लेकिन मज़दूर वर्ग का वक़्त, यानी
सभी लोगों के एक हो जाने का वक़्त अभी भी नहीं आया है।
“वर्ल्ड हिस्ट्री फ़ॉर वर्कर्स” पृष्ठ 47, अल्फ़्रेड बार्टन कृत²
पृष्ठ 45 (42)
सर हेनरी मेन³ ने कहा है :
“इंग्लैण्ड की अधिकांश भूमि वकीलों की ग़लती से इसके वर्तमान स्वामियों
के हाथ में चली गयी है – जिन ग़लतियों के परिणामस्वरूप छोटे-छोटे अपराधियों
को भी फाँसी की सज़ा दे दी गयी।”
“कानून मुजरिम क़रार कर देता है उस पुरुष या स्त्री को
जो चुराते हैं आम आदमी की मुर्गियाँ,
लेकिन छोड़ देता है बड़े अपराधियों को
जो चुरा लेते हैं मुर्गियों से आम आदमी को ही।”⁴
पृष्ठ 46 (43)
जनतन्त्र
जनतन्त्र, सैद्धान्तिक तौर पर, राजनीतिक और क़ानूनी समानता की एक
प्रणाली है। लेकिन ठोस और व्यावहारिक कार्रवाई में, यह मिथ्या है, क्योंकि कोई
समानता तब तक नहीं हो सकती, यहाँ तक कि राजनीति में और क़ानून के
समक्ष भी नहीं, जब तक कि आर्थिक शक्ति में असमानता मुँह बाये बरक़रार
रहेगी; जब तक कि सत्ताधारी वर्ग मज़दूरों के रोज़गार पर, देश के प्रेस और
स्कूलों पर तथा जनमत तैयार करने और अभिव्यक्त करने के सभी साधनों पर
अपना अधिकार जमाये रखेगा, जब तक कि यह सभी प्रशिक्षित सार्वजनिक
कार्यकारी निकायों पर अपना एकाधिकार बनाये रखेगा, और चुनावों को प्रभावित
करने के लिए बेशुमार धन ख़र्च करता रहेगा, जब तक कि क़ानून सत्ताधारी वर्ग
- आगस्त कॉम्टे (1798-1857) : फ्रांसीसी विचारक
- अन्य विवरण अनुपलब्ध
- सम्भवतः ब्रिटिश इतिहासकार और विधिवेत्ता सर हेनरी समर मेन (1822-1888), भारत
में 1863 से 1869 तक काउंसिल के सदस्य, और कलकत्ता विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर
भी रहे - इंग्लैण्ड में 19वीं सदी में एक अज्ञात कवि के द्वारा लिखी कविता का अंश
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 593