सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 553, कुल 788 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 553

भूमिका

शहीदेआज़म की जेल नोटबुक को हिन्दी पाठकों के हाथों में देते हुए हमें मिश्रित
अनुभूति हो रही है। इतिहास की इस अनमोल धरोहर को आप तक पहुँचाकर हम
गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं, पर साथ ही इसमें हुई देरी की कचोट भी है।
भारतीय इतिहास के इस दुर्लभ दस्तावेज़ का महत्त्व सिर्फ़ इसकी ऐतिहासिकता
में ही नहीं है। भगतसिंह के अधूरे सपने को पूरा करने वाली भारतीय क्रान्ति आज
एक ऐसे पड़ाव पर है जहाँ से नये, प्रचण्ड वेग से आगे बढ़ने के लिए इसके
सिपाहियों को 'इन्क़लाब की तलवार को विचारों की सान पर' नयी धार देनी है।
यह नोटबुक उन सबके लिए विचारों की रोशनी से दमकता एक प्रेरणापुंज है जो
इस विरासत को आगे बढ़ाने का जज़्बा रखते हैं।
आज जब भारतीय क्रान्ति सामने उपस्थित सवालों-चुनौतियों से जूझ रही है,
युवा क्रान्तिकारियों की नयी पीढ़ी के कन्धों पर रास्ता निकालने और उस पर बढ़ने
का कार्यभार है तथा एक नये सर्वहारा नवजागरण और प्रबोधन का काम इतिहास
के एजेण्डे पर है, तो इस नोटबुक को पढ़ते हुए हमारी आँखों के सामने बार-बार
उस नौजवान की छवि उभरती है जो फाँसी के फन्दे के साये में बैठकर भारतीय
इन्क़लाब के रास्ते की सही समझ हासिल करने और उसे लोगों तक पहुँचाने के
लिए आख़िरी पल तक अध्ययन-मनन और लेखन में जुटा रहा।
जेल में भगतसिंह ने चार पुस्तकें लिखी थीं। हो सकता है ये नोट्स इन पुस्तकों
की तैयारी में लिये गये हों। चारों पाण्डुलिपियाँ आज नष्ट हो चुकी हैं। लेकिन आज
भी उनके बारे में न तो कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध है और न ही किसी ने
भारतीय इतिहास के इस अँधेरे पक्ष पर शोध करने की ज़रूरत समझी है।
नोट बुक के महान ऐतिहासिक महत्त्व और आज इसकी विशेष प्रासंगिकता को
रेखांकित करने के लिए हमने आलोक रंजन और एल. वी. मित्रोखिन के दो लेख
भी शामिल किये हैं। हम चाहेंगे कि आप नोटबुक से पहले इन लेखों को अवश्य
पढ़ें। नोटबुक को सही परिप्रेक्ष्य और पृष्ठभूमि में समझने में इन लेखों से काफ़ी
मदद मिलेगी। भारत के क्रान्तिकारी आन्दोलन के वैचारिक विकास पर हमने
भगतसिंह के साथी शिववर्मा का विस्तृत लेख भी शामिल किया है।
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 547