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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 506, कुल 788 में से

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पृष्ठ 506

जो पर्दे के पीछे चमत्कार कर रहा है, हिन्दुस्तान के युवा रक्त में भी प्रकट हो रहा
है और एक आन्दोलन को आकार दे रहा है। इस आन्दोलन से बुद्धिमान और विद्वान
नफ़रत करते और इसकी उपेक्षा करते हैं और इसे चन्द सिरफिरे लोगों के पागलपन
भरे सपने कहा जाता है। यह अनोखा आन्दोलन नौजवान हिन्दुस्तान का क्रान्तिकारी
आन्दोलन है। इस क्रान्तिकारी आन्दोलन ने नाजुक लोगों के होश उड़ा दिए हैं और
बलवान तथा स्वस्थ को प्रेरित किया है। इसने दुनियाभर और ज्ञानी लोगों को हैरान
कर दिया है। जिस तरह आने वाले बसन्त को रोका नहीं जा सकता है उसी तरह
से इस आन्दोलन को कभी कुचला नहीं जा सकता। जब तक यह उस मिशन को
पूरा नहीं कर लेता जिसके लिए उसने जन्म लिया है, तब तक यह मर नहीं सकता।
अत्याचारी इसे दबायेंगे। अविश्वासी इस पर ताने कसेंगे और सम्भ्रान्त इसकी निन्दा
करेंगे, लेकिन विचारों और सपनों को कभी भी तलवार से हराया नहीं जा सकता
और जो उदात्त संवेग इसके अस्तित्व की गहराई से पैदा हो गया है, उसको कभी
न तो अनदेखा किया जा सकता है और न ही हँसी में उड़ाया जा सकता है।
क्रान्तिकारी आन्दोलन उस नए जीवन की अभिव्यक्ति है जो राष्ट्र में जन्म ले
चुका है। इस जीवन की निन्दा अपनी खुद की समझ की निन्दा करना है।
बीस साल का बेरहम दमन इसको कुचल नहीं पाया है। विख्यात जन-नेताओं
द्वारा की गयी कठोर निन्दाएँ इसके बढ़ाव को रोक नहीं पायी हैं। क्रान्तिकारी पार्टी
की सम्भावनाएँ जितनी उज्ज्वल आज हैं उतनी पहले कभी नहीं थीं। भविष्य
सुनिश्चित है।
विदेशी शासकों के दमनकारी उपायों की निन्दा करने के लिए किसी भी
भारतीय को इस क्रान्तिकारी पार्टी के अस्तित्व से इन्कार नहीं करना चाहिए।
विदेशियों को भारत पर राज करने का कोई अधिकार नहीं है और इसलिए उनकी
निन्दा करनी चाहिए और उनको निकाल बाहर करना चाहिए। बात यह नहीं कि
उन्होंने हिंसा अथवा अपराध की कोई ख़ास कार्रवाई की है, विदेशी राज के कुछ
स्वाभाविक परिणाम होते हैं। इस विदेशी राज को ख़त्म कर दिया जाना ज़रूरी है।
भारत पर राज करने का उनका कोई औचित्य नहीं है सिवा तलवार के और इसलिए
क्रान्तिकारी पार्टी ने तलवार उठा ली है। लेकिन क्रान्तिकारी पार्टी की तलवार पर
विचारों की धार है।
राजनीति के क्षेत्र में क्रान्तिकारी पार्टी का फ़ौरी उद्देश्य संगठित एवं सशस्त्र
क्रान्ति के द्वारा भारत के मुक्त प्रान्तों के संघीय गणतन्त्र की स्थापना करना है। इस
गणतन्त्र के संविधान को ऐसे समय अन्तिम रूप दिया और घोषित किया जायेगा
जब भारत के प्रतिनिधियों के पास अपने फ़ैसले को अमल में लाने की शक्ति होगी।
अलबत्ता, इस गणतन्त्र का मूलभूत सिद्धान्त सार्विक मताधिकार और ऐसी समस्त
व्यवस्थाओं का उन्मूलन होगा जोकि मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण को सम्भव बनाती
500 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़