भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 445, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन
का घोषणापत्र
लाहौर कांग्रेस में बाँटे गये इस दस्तावेज़ को भगतसिंह और अन्य साथियों से
विचार-विमर्श के बाद मुख्य रूप से भगवतीचरण वोहरा ने लिखा था। दुर्गा भाभी
और दूसरे क्रान्तिकारी साथियों ने इसे वहाँ वितरित किया। सी.आई.डी. ने इसे ज़ब्त
कर लिया था और उसी के काग़ज़ों से इसकी प्रति मिली।
स्वतन्त्रता का पौधा शहीदों के रक्त से फलता है। भारत में स्वतन्त्रता का पौधा
फलने के लिए दशकों से क्रान्तिकारी अपना रक्त बहाते रहे हैं। बहुत कम लोग
हैं जो उनके मन में पाले हुए आदर्शों की उच्चता तथा उनके महान बलिदानों पर
प्रश्नचिह्न लगायें, लेकिन उनकी कार्रवाइयाँ गुप्त होने की वजह से उनके वर्तमान
इरादे और नीतियों के बारे में देशवासी अँधेरे में हैं, इसलिए हिन्दुस्तान सोशलिस्ट
रिपब्लिकन एसोसिएशन ने यह घोषणापत्र जारी करने की आवश्यकता महसूस
की है।
विदेशियों की गुलामी से भारत की मुक्ति के लिए यह एसोसिएशन सशस्त्र
संगठन द्वारा भारत में क्रान्ति के लिए दृढ़ संकल्प है। गुलाम रखे हुए लोगों की ओर
से स्पष्ट तौर पर विद्रोह से पूर्व गुप्त प्रचार और गुप्त तैयारियाँ होनी आवश्यक हैं।
जब देश क्रान्ति की उस अवस्था में आ जाता है तब विदेशी सरकार के लिए उसे
रोकना कठिन हो जाता है। वह कुछ देर तक तो इसके सामने टिक सकती है,
लेकिन उसका भविष्य सदा के लिए समाप्त हो चुका होता है। मानवीय स्वभाव
भ्रमपूर्ण और यथास्थितिवादी होने के कारण क्रान्ति से एक प्रकार का भय प्रकट
करता है। सामाजिक परिवर्तन सदा ही ताक़त और विशेष सुविधाएँ माँगने वालों के
लिए भय पैदा करता है। क्रान्ति एक ऐसा करिश्मा है जिसे प्रकृति स्नेह करती है
और जिसके बिना कोई प्रगति नहीं हो सकती – न प्रकृति में और न ही इन्सानी
कारोबार में। क्रान्ति निश्चय ही बिना सोची-समझी हत्याओं और आगजनी की
दरिन्दा मुहिम नहीं है और न ही यहाँ-वहाँ चन्द बम फेंकना और गोलियाँ चलाना
विचारों की सान पर क्रान्ति की तलवार / 439