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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 433, कुल 788 में से

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पृष्ठ 433

आवाज़ दबाना दुखदायी है!
सुखदेव के भाई मथुरादास की पुस्तक ‘अमर शहीद सुखदेव’ में प्रकाशित
लेखकीय टिप्पणी के अनुसार सुखदेव ने यह पत्र सम्भवतः चन्द्रशेखर आज़ाद के
नाम लिखा था, जो उन तक पहुँच नहीं पाया। – स.
प्यारे साथी,
अभी-अभी पता चला है कि हमारा वह statement जो हमने 3 तारीख़ को
दिया है अखबार वालों ने नहीं छापा। कारण यह कहा जाता है कि उसमें लीडरों
को criticise किया गया है और उनके इस समझौते को बुरा कहा गया है। उफ़,
कैसी शरम की बात है! भाई, सच पूछो तो हमें सरकार फाँसी नहीं लगा रही। हमारा
गला तो हमारे So-called leaders ही दबा रहे हैं जो हमारी आवाज़ निकलने नहीं
देते। सरकार द्वारा गला दबाना हमारे लिए बुरा सिद्ध नहीं हो सकता। उसको हम
सहन कर सकते हैं लेकिन यह बात हमारे से बरदाश्त नहीं हो सकती कि हमारा
गला हमारे ये स्वार्थी high class leaders दबायें। इसके विरुद्ध हमें लड़ना पड़ेगा।
अपनी struggle को हमें उनसे अलग होकर स्वतन्त्र रूप से चलाना होगा और
सरकार का विरोध करते-करते इन उच्च जाति-नेताओं की पोल भी खोलनी पड़ेगी।
परन्तु दोस्तो, यह कार्य ज़्यादा देरी तक neglect नहीं किया जा सकता। इस
पर हमें विचार करना चाहिए और उसके लिए शीघ्र ही प्रबन्ध करना चाहिए। और
कब तक ऐसा व्यवहार सहते रहोगे। हम क्रान्तिकारियों के प्रति उनके इस प्रकार
neutral relation और हमारी गिरावट के दो मुख्य कारण हैं। पहला यह कि हमारी
कोई स्थायी organisation नहीं है, जो उनके मुक़ाबले में और उनसे अलग अपनी
lines पर काम कर रही हो। दूसरा यह कि जो भी थोड़ा-बहुत scattered element
है उसके हाथ में Press नहीं है जिसके द्वारा वह अपनी आवाज़ जनता तक पहुँचा
सके और जिसके बल पर वह बढ़े, डटकर सरकार तथा इन उच्च जाति-सन्तों का
भलीभाँति विरोध कर सके।
अनेक कारणोंवश हम लोगों को आज तक केवल गुप्त समितियाँ बनाकर ही
काम करते रहना पड़ा है। परन्तु यारो, अब समय आ गया है कि हम इस policy
जेल की सलाख़ों के पीछे से / 427