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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 401, कुल 788 में से

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पृष्ठ 401

मित्र अमरचन्द को लिखा
भगतसिंह का पत्र
भगतसिंह ने यह पत्र अपने मित्र अमरचन्द को 1927 में लिखा था जो उस समय
अमेरिका में पढ़ रहे थे। – स.
प्यारे भाई अमरचन्द जी,
नमस्ते।
अर्ज़ है कि इस दफ़ा अचानक माँ के बीमार होने पर इधर आया और आपकी
मोहतरिमा वाल्दा (आदरणीया माँ) के दर्शन हुए। आपका ख़त पढ़ा। इनके लिए
यह ख़त लिखा। साथ ही दो-चार अल्फ़ाज़ लिखने का मौक़ा मिल गया। क्या
लिखूँ, करम सिंह विलायत गया है, उसका पता भेजा जा रहा है। अभी तो उसने
लिखा है कि लॉ पढ़ेगा, मगर कैसे चल रहा है, सो खुदा जाने, ख़र्च बहुत ज़्यादा
हो रहा है।
भाई, हमारी मुमालिक गैर (विदेश) में जाकर तालीम हासिल करने की
ख़्वाहिश खूब पायमाल (बरबाद) हुई। अच्छा, तुम्हीं लोगों को सब मुबारक़, कभी
मौक़ा मिले तो कोई अच्छी-अच्छी कुतब (पुस्तकें) भेजने की तकलीफ़ उठाना।
आख़िर अमेरिका में लिट्रेचर तो बहुत है। ख़ैर, अभी तो अपनी तालीम में बुरी तरह
फँसे हुए हो।
सानफ़्रांसिस्को वग़ैरह की तरफ़ से सरदारजी (अजीत सिंह जी) का शायद
कुछ पता मिल सके। कोशिश करना। कम अज़ कम ज़िन्दगी का यक़ीन तो हो
जाये। मैं अभी लाहौर जा रहा हूँ। कभी मौक़ा मिले तो ख़त तहरीर फ़रमाइयेगा। पता
सूत्र मण्डी लाहौर होगा। और क्या लिखूँ? कुछ लिखने को नहीं है। मेरा हाल भी
खूब है। बारहा (कई बार) मुसायब (मुसीबतों) का शिकार होना पड़ा। आख़िर
केस वापस ले लिया गया। बादवाँ (बाद में) फिर गिरफ़्तार हुआ। साठ हज़ार की
जमानत पर रिहा हूँ। अभी तक कोई मुक़दमा मेरे ख़िलाफ़ तैयार नहीं हो सका और
ईश्वर ने चाहा तो हो भी नहीं सकेगा। आज एक बरस होने को आया, मगर जमानत
जेल की सलाख़ों के पीछे से / 395